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________________ ६१० ] [ गो. प्र. चिन्तामणि -गृहस्थ लोग जो अपने जिन घर प्रतिमा रखते हैं, उसकी मर्यादा ग्यारह अथवा बारह अंगुल प्रमाण है। बारह अंगुल से ऊंची प्रतिमा जिन मंदिर में ही स्थापन करनी चाहिये, यह बात प्रसिद्ध है, परंतु ग्यारह अंगुल में भी एक दो तीन चार आदि अंगुलों की प्रतिमा के प्रमाण का क्या फल है ? प्रश्न : उत्तर :- - जो गृहस्थ अपने घर जिन-प्रतिमा को रक्खें तो अत्यंत योग्य और ऊँचे स्थान पर रखना चाहिये। आगे प्रतिमा की ऊँचाई का अलग-अलग फल बतलाते हैं - एक अंगुल की प्रतिमा पूजा करने वाले के लिये श्रेष्ठ है । दो अंगुल की प्रतिमा वन नाश करने वाली है। तीन अंगुल ऊँची प्रतिमा वृद्धि को उत्पन्न करती है । चार ऊँची प्रतिमा पीड़ा उत्पन्न करती है। पांच अंगुल की प्रतिमा सुख की वृद्धि करती है। छह अंगुल की प्रतिमा उद्वेग करती है। सात अंगुल की प्रतिमा गायों की वृद्धि करती है । आठ अंगुल की प्रतिमा हानि करती है। नौ अंगुले की प्रतिमा पूजा करने के लिये हो तो पुत्रों को वृद्धि करती है । दश अंगुल ऊंची प्रतिमा धन का नाश करती है । ग्यारह अंगुल को प्रतिमा गृहस्यों के समस्त काम और अर्थ की सिद्धि करने वाली होती है। इससे अधिक ऊंची प्रतिमा गृहस्थी को अपने घर नहीं रखनी चाहिये । हाँ, जिन मन्दिर में विराजमान करने में कोई हानि नहीं है । इस प्रकार एक से लेकर स्यारह अंगुल प्रमाण प्रतिमा शुभाशुभ फल वतलाया । इनमें भी जो शुभ प्रतिमाएँ हैं, यदि उनकी नाक, मुख, नेत्र, हृदय, नाभि आदि स्थान खंडित हो जायं, तो घर में रखकर नहीं पूजना चाहिये। ऐसा दीक्षाकल्प में लिखा है--- Re: संप्रवक्ष्यामि गृहबिम्बस्य लक्षणम् । एकांगुलं भवेच्छेष्ठं ध्यगुलं धनाशनम् ॥१६१५॥३ त्र्यंगुले जायते वृद्धि: पोडा स्पाक्चतुरंगुले | पंचामुले तु बृद्धिः स्याबुद्धगस्तु डंगुले ॥ ११६॥ सप्तगु गर्वावृद्धिः हानिरष्टांगुले मता । नयांले पुत्रवृद्धि धननाशो दशांगुले ॥११७॥ एकादशांगुले बिम्बं सर्वकामर्थ साधनम् । एतत्प्रमाण मारयात मतरुद्धर्व न फारयेत् ॥१६१८ ॥
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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