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________________ विषय प्रतियोगिमद्ज्ञानभिन्न अधिकरणज्ञानरूप पृष्ठ अभाव ८३ आरोप्य संबंध में उभयाभावघटित अभावव्याख्या ८३ ८५ प्रभाकरमत में दूषण परंपरा उत्पत्ति के पूर्व वस्तु सर्वथा असत् नहीं होती ८५ नियतकार्योलादन शक्तिरूप से कार्यसत्ता कार्यरूप शक्ति का अभाव असत्कार्यवाद का समर्थक नहीं है ८६ असत् वस्तु उत्पादन की शक्ति का असंभव ८६ पूर्वावधि - उत्तरावधि की कल्पना व्यथं असत् के लिये कारण व्यापार असंगत बौद्ध के द्वारा 'सत्व अर्थात् सत्तासंबंध इस अर्थ का खंडन ८८ वस्तुस्वरूप से ही सद्रूप नहीं ८९ सत्त्व का स्वरूप अर्थ क्रियाकारित्व कैसे ? - बौद्ध ६ ८७ ८८ ९० ९१ तत्कार्यार्थी को तत्कारणनिष्ठ कारणता का ज्ञान अपेक्षित नहीं प विशेष कार्यकारण भाव मानना जरुरी संबंध बिना कार्योत्पत्ति का असंभव विपयता ज्ञानस्वरूप है- पूर्वपक्ष शका सम्बन्धमाद्वयसापेक्ष-उत्तरपक्ष .... असत्कार्यवाद में सर्वकार्योत्पत्ति को आपत्ति ६३ विशेष कार्यकारणभाव असत्कार्यवाद में ९२ ९२ असंगत ९३ ६ ४ क्षणिकवाद में कारणता अनुपपन्न क्षणिकवाद अव्यवहित उत्तरकाल के नियम की असंगति ९४ उत्पत्ति-नाश कार्य-कारण से भिन्न या अभिन्न ? नाश और कारण का धर्म-धर्मिभाव कल्पित है - पूर्वपक्ष कल्पित धर्म - धर्मिभाव से कारणत्व की अनुपपत्ति-उत्तर पक्ष ६५ ९६ २७ १० विषय पृष्ठ धर्मी अकल्पित, धर्म-धर्मिभाव कल्पित बौद्ध ६७ कारणपरिणति विना कार्य का असंभव ६८ कारणक्षण के आश्रयण से कार्योत्पत्तिकथन को असंगति ९८ कारण की सत्ता फलपरिणामस्वरूप कार्य के रूप में अभंग ९९ का० ५६ के अवतरण में पक्षद्वयी..... १०० मिट्टी में पटकुरूपत्व क्यों नहीं हो सकता ? निश्चित कारण से नियतकार्योत्पत्ति क्षणिकवाद में असंभव १०२ बौद्धमत में कारपदेश में ही कार्योत्पत्ति का असंभव समानदेशत्व का अभाव वाघक नहीं बौद्ध स्वभाव से ही देशविशेष का नियम संभव - बौद्ध समानदेशता का नियम अभंग- जैन शान्तरक्षित के 'असत् पदार्थ वस्तुजनक नहीं होता' कथन को व्यर्थता १०५ कारण के बाद कार्यसत्ता - भावोत्पत्ति १०१ १०२ १०३ १०४ १०४ और भाव सन एकरूप है १०६ असत् की नहीं प्रागसत् की उत्पत्ति और सत्ता मान्य है १०७ शान्तरक्षित मत की असारता हेतु-फल का ऐक्य १०७ असत् पदार्थ अकस्मात् या सत्त्वलाभ करके उत्पन्न नहीं हो सकता १०८ प्रागसत्त्व होने से असद् उत्पत्ति होने का पक्ष असार है १०९ प्रागसत्र की तुच्छता से प्राक् सत्व को आपत्ति नहीं है- बोद्ध १०९ बौद्ध पक्ष में असत् के सत्व की आपत्ति ११० अभाव का भाव संभव नहीं है- उपसंहार १११ समवायिकारणोपादानतावादी नैयायिक का पूर्वपक्ष १११
SR No.090419
Book TitleShastravartta Samucchaya Part 4
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorBadrinath Shukla
PublisherDivya Darshan Trust
Publication Year
Total Pages248
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size8 MB
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