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________________ श्लोक पृष्ठ ४१-४४ ४५ - ६२ १६-२२ ६३ -७० ७१ -११ विषय अपूर्वकरण गुणस्थानमें होने वाले कार्यका वर्णन अनिवृत्तिकरण गुणस्थानका कार्य मोहनीयकर्मको क्षपणाविधिके अन्तर्गत ___ क्षायिकसम्यग्दर्शन प्राप्त करनेका कथन चारित्रमोहनोयको क्षपणाविधिका वर्णन प्रकरणका समारोप तृतीय प्रकाश मङ्गलाचररण महाव्रताधिकारके अन्तर्गत महाव्रतका लक्षण और उनके नाम अहिंसामहानतका स्वरूप जीवकी जातियोंका वर्णन, तदन्तर्गत नरकगतिका वर्णन तिर्यच्चगतिसम्बन्धो जोवोंका वर्णन पृथिवी, जल, अग्नि और वायुकायिक जीवोंके विशेष प्रकार वनस्पतिकायिक जोवोंके प्रकार त्रसजोवोंका वर्णन सत्यमहानतका वर्णन, तदन्तर्गत असत्यके चार भेद अज्ञानजन्य और कषायजन्यकी अपेक्षा असत्यके दो भेदोंका वर्णन अचौर्यमहावतका वर्णन ब्रह्मचर्यमहाव्रतका निरूपण अपरिग्रहमहावतका वर्णन अपरिग्रहमहाव्रतमें दोष लगाने वाले मुनियोंका वर्णन अहिंसामहारतको पाँच भावनाएं सत्यमहावतको पांच भावनाएं अचौयंमहावतको पाँच भावनाएं १२ - २२ - - २५ - ३५ ३० - ३२ ३६ - ४४ ४५ - ५१ ३३ . ३४ ३४ - ३६ - ६२ - ७१ । 1NU । । ६३ - १०० ४० १०१ - १०३ १०४ १०५ - १०७
SR No.090411
Book TitleSamyak Charitra Chintaman
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year
Total Pages234
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size4 MB
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