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________________ MARAT -.-.'. HI -. ia d ६०/४८५ Hamarin A । परिकाष्टक सम्बन्धी प्रकरण इहां उदाहरण - तहां संकलन विर्षे पांच छट्ठा अंश दोय तिहाइ तीन पाव (चौथाई) इनकौं जोडना होइ तहां ऐसा लिखि तहां पांच हार कौं अन्य के तीन च्यारि-अंशनि करि पर दोय हार कौं अन्य के छह-च्यारि अंशनि करि अर तीन हार कौं अन्य के छह-तीन अंशनि करि गुणे साठि अडतालीस चौवन हार भए । अर अंशनि कौं परस्पर गुरपे सर्वत्र बहत्तर अश७२७२/७२ ऐसे भए । इहां हारनि कौं जोडे एक सो बासठ हार पर बहत्तर अंश भए तहां हार की अंश का भाग दीए दोय पाये अर अवशेष अठारह का बहत्तरिवां भाग रह्या । ताका अठारह करि अपवर्तन कीए एक का चौथा भाग भया । ऐसें तिनका जोड सवा दोय पाया। कोई संभवता प्रमाण का भाग देश भाज्य वा भाजक राशि का महत् प्रमाण को थोरा कीजिए (वा निःशेष कीजिए) तहां अपवर्तन संज्ञा जाननी सो इहां अठारह का भाग दीए भाज्य अठारह था, तहां एक भया अर भागहार बहत्तर था, तहां च्यारि भया, तातै अठारह कर अपवर्तन भया कह्या । ऐसे ही अन्यत्र अपवर्तन का स्वरूप जानना । - बहुरि व्यवकलन विर्षे जैसे तीन विर्षे पांच चौथा अंश घटावना । तहां 'कल्प्यो हरो रूपमहारराशेः' इस वचन तें जाकै अंश न होइ, तहां एक अंश कल्पना, सो इहां तीनका अंश नाहीं, तातै एक अंश कल्पि। ऐसे लिखना इहां तीन हारनि कौं अन्य के च्यारि अंश करि, अर पांच हारनि कौं अन्य के एक अंश करि गुणे अर अंशनि कौं परस्पर गुरणे | ऐसा भया । इहां बारह हारनि विर्षे पांच घटाएं सात हार भए । अर अंश च्यारि भए । तहां हार कौं अंश का भाग दीए एक अर तीन का चौथा भाग पौरण इतना फल आया। .. - बहुरी भिन्न गुणकार विर्षे गुण्य अर गुणकार के हार की हार करि अंश कौं अंश करि गुणन करना । जैसे दश को चोथाइ कौ च्यारि की तिहाइ करि गुणना होइ, तहां ऐसा । लिखि गुण्य-गुणकार के हार पर अंशनि कौं गुणें चालीस हार अर बारह २ भए तहां हार कौं अंश का भाग दीए तीन पाया । अब शेष च्यारि का बारहवां भाग ताको च्यारि करि अपवर्तन कीए एक का तीसरा भाग भया । जैसे ही अन्यत्र जानना। न %D - Marr maverintent i on
SR No.090410
Book TitleSamyaggyanchandrika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashpal Jain
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages873
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size28 MB
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