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________________ - ६३० ] I गोम्मटसार जीवकामय गाथा ५४७ - -- - बाहिर सूईयग्गं, अभंतर सूइधग्ग परिहीणं । जंबूबासविहत्ते, तेसियमेसारिण खंडारिंग ।। बाह्य सूची का वर्ग विषे अभ्यंतर सूची का प्रमाण घटाए, जो प्रमाण रहै, ताकी जंबूद्वीप का व्यास के वर्ग. का भाग दीए, जो प्रमाण आवै, तितने जंबूद्वीप समान खंड जानने । अंत तें लगाई, वाके सन्मुख अंत पर्यंत जेता सूधा क्षेत्र होइ, ताको बाह्य सूची कहिए। बहुरि प्रादि ते लगाइ, वाके सन्मुख आदि पर्यंत जेता सूधा क्षेत्र होइ, ताकौं अभ्यंतर सूची कहिये । सो यहां लवण समुद्र विर्षे उदाहरण करि लवण समुद्र की बाह्य सूची पांच लाख योजन, ताका वर्ग कीजिये तब लाख गुणां पचीस लाख भया । बहुरि तिस ही की अभ्यंतर सूची एक लाख योजन, ताका वर्ग लाख गुरणा लाख योजन, सो घटाये अवशेष लाख गुणा चौईस लाख, ताका जंबूद्वीप का व्यास लाख योजन, ताका वर्ग लाल मुरणां लाख योजन, ताका भाग दीजिए तब चौईस रहे, सो जंबूद्वीप समान चौबीस खंड लवण समुद्र विर्षे जानने । असे ही सर्व द्वीप समुद्रनि विर्षे साधने । इस साधन के प्रथि और भी प्रकार कहै हैं--- रूऊण सला बारस, सलागगुरिगवे दु वलयखंडाणि । बाहिरसूइ सलामा, कदी तदंताखिला खंडा ।। इहां व्यास विर्षे जितना लाख कह्या होइ, तितने प्रमाण शलाका जानना । सो एक घाटि शलाका कौ बारह शलाका करि गुणों, जंबूद्वीप प्रमाण वलयखंड हो हैं। जैसे लवण समुद्रनि विर्षे व्यास दोय लाख योजन है, तातें शलाका का प्रमाण दोय, तामै एक घटाएं एक, ताका बारह शलाका का प्रमाण चोईस करि गुरणे, चौईस खंड हो हैं । बहुरि बाह्य सूची संबंधी शलाका का वर्ग प्रमाण तीहि पर्यंत खंड हो है । जैसे लवण समुद्र विर्षे बाह्य सूची पांच लरख योजन है । सातै शलाका का प्रमाण पाचं ताका वर्ग पचीस, सोई लवण समुद्र पर्यंत सर्व खंडनि का प्रमाण हो है । जंबूद्वीप विर्षे एक खंड पर लक्षण समुद्र विर्षे चौवीस खंड, मिलि करि पचीस खंड हो है। बहुरि और भी विधान कहै हैं बाहिरसूईवलयन्यासूखा चउगुरिणावासहदा । इकलक्खवग्गभजिदा, जंबूसमवलयखंडाणि ॥१॥
SR No.090410
Book TitleSamyaggyanchandrika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashpal Jain
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages873
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size28 MB
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