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________________ [ मोम्मटसार भोरा गावा ६५ . .... .. जीवनि की संख्या 'बह भागे समभागो' इत्यादि गाथा करि कही थी। तैसे इहां भी संख्या का साधन करना । सोई कहिये है -- मनुष्यगति विषं जो जीवमि का परिमाण है, तामें कषाय रहित मनुष्यनि का प्रमारंग घटाएं, जो अबशेष रहै, ताकौ प्रावली का असंख्यातवां भाग का भाग दीएं, तहां एक भाग जुदा राखि, अवशेष बहुभाग का प्रमाण रह्या, ताके च्यारि भाग करि च्यार्यों कषायनि के स्थाननि विर्षे समान देने । बहुरि जो एक भाग रह्या, ताकौं प्रावली का असंख्यातवां भाग का भाग दीजिए, तहाँ एक भाग को जुदा राखि, अवशेष बहुभाग रहे, तिनिौ लोभ कषाय के स्थान समान भाग विर्षे जो प्रमाण था, तामै जोडै, जो परिमारण होइ, तितने लोभकषाय वाले मनुष्य जानने । बहुरि तिस अवशेष एक भाग कौं भावली का असंख्यातवां भाग का भाग दीजिए, तहां एक भाग को जुदा राखि, अवशेष बहुभाग रहे, तिनिकौं माया कषाय के स्थान समान भाग विर्षे जो परिमारण था, तामैं मिलाएं, जो परिमाण होइ, तितने मायाकषाय वाले मनुष्य जानने । बहुरि तिस अवशेष एक भाग की आवली का असंख्यातवां भाग का भाग दीजिए, तहां एक भाम कौं जुदा राखि, अवशेष बहुभाग रहै, तिनिकों क्रोधकषाय के स्थान समान भाग विर्षे जो परिमाण था, तिस विर्षे मिलाएं, क्रोधकषाय वाले मनुष्यान का परिमाण हो । बहुरि तिस अवशेष एक भाग का जेता परिमारा होइ, ताकौं मानकषाय के स्थान समान भाग विर्षे जो परिमारण था, तामैं मिलाएं, मानकाय वाले मनुष्यनि का परिमाण होइ, असे ही तिथंच गति विर्षे जानना । विशेष इतना जो वहां मनुष्य गति के जीवन का परिमारण विर्षे भाग दीया था। इहां तिर्यंच गति के जीवनि का जो देव, नारक, अनुरुप राशि करि हीन सर्व संसारी जीवराशि मात्र परिमाण, ताकौं भाग देना; अन्य सर्व विधान तैसे ही जानना । असे कषायनि विर्षे तिर्यंच जीवनि का परिमाण जानिए । अथवा अपना-अपना कषायनि का काल को अपेक्षा जीवनि की संख्या जानिए; सो दिखाइए है । च्यार्यों कषायनि का काल के समयनि का जो अंतर्मुहूर्त मात्र परिमाण है, ताकौं प्रावली का असंख्यातवां भांग का भाग दीजिए। सहां एक भाग को जुदा राखि, अवशेष के च्यारि भाग करि, च्यारी जायगा समान दीजिए । बहुरि अवशेष एक भाग कौं पावली का प्रसंख्यातवां भाग का भाग देइ, एक भाग कौं जुदा राखि, अवशेष बहुभाग रहे, तिनिकौँ समान भाग विषं जो परिमाण था, तामें मिलाएं. लोभकषाय के काल का परिमाण होइ । बहुरि तिस अबशेष एक भाग को तैसं भाग देइ, एक भाग बिना अवशेष बहुभाग समान भाग का प्रमाण विर्षे मिलाएं, माया का काल होइ । बहुरि तिस अवशेष एक भाग कौं तैसें भाग - -. - - -DAMEN'S - ate D
SR No.090410
Book TitleSamyaggyanchandrika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashpal Jain
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages873
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size28 MB
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