________________
गुटका संग्रह ]
[ १०५१
निम्न पाठ नहीं हैं--
ऋषभदेव जी की स्तुति, बहतरि सीख, अष्ट गंध की विधि यंत्र, नामावली, महस', सरोगा; दिल्ली की जन्म पत्रिका।
यह पुस्तक सं० १९३१ में वठलीराम रामप्रसाद कासलीवाल बर वाले ने भरतपुर के मंदिर में
१८०६. गुटका सं० ५। पत्रसं० २०२ । माषा-संस्वात-हिन्दी । लेकाल सं० १८८२ । पूर्ण । वेष्टन सं० २६७ ।
विशेष - नित्य पूजा पाठ हैं। पत्र १०३ से १६६ तक बहुत मोटे अक्षर हैं । षोडष कारण तथा दशलक्षण जयभाल हैं। प्राकृत माथाओं के नीचे संस्कृत अर्थ है । ३५ पाठों का संग्रह है।
६८०७. गुटका सं० ६. पत्र सं० ७५६ । भाषा-हिन्दी । लेकाल ४ । पूर्ण । वेष्टन सं० २७२।
विशेष—१२० पाठों का संग्रह है । अक्षर सुन्दर तथा काफी मोटे हैं । प्रारम्भ में पूजा प्राकृत तथा विनोदी लाल कृत मंगल पाठ हैं। प्रारम्भ में विषय सूचना भी दी हुई है । नित्य नैमित्तिक पाठों के अतिरिक्त निम्न पाठ और है
भजन-जगतराम, नवलजी, जोधराज, वानसराय जी आदि के पद तथा टोष्टरमल कृत दर्शन तथा शिक्षा छन्द ।
१६.८. गुटका स०७ । पत्रसं० ६६ । भाषा - हिन्दी । ले०काल X । पुर्ण । वेष्टन सं. २६५ ।
विशेष-निम्न संग्रह हैं
पार्श्वनाथ स्तोत्र. रिद पजा. भक्तामर स्तोत्र. संस्कृत तथा भाषा, कल्याण मन्दिर स्तोत्र, भाषा द्वादशानुप्रेक्षा, त्रिलोकसार भाषा-रचना सुमति कीति, २० काल १६२७ ।
छहढाला-द्यानतराय । २० काल १७५६ । . समाधिमरण
९.०९. गुटका सं०८ । पत्रसं० ३१६ । भाषा - हिन्दी ।ले० काल सं० १०५५ पूर्ण वेष्टन सं. २६६1
विशेष-४६ पाओं का संग्रह है । सब नित्य पाठ ही हैं। जोधराज जी कासलीवाल कामा वालों ने लिखाई । अक्षर बहुत मोटे - एक पत्र पर पाठ लाइन हैं तथा प्रत्येक लाइन में १३ अक्षर हैं। एक टोडर मल कृत दर्शन भी है जो गद्य में है।
६८१०. गुटका सं०६ । पत्र सं० १७० । भाषा-हिन्दी। से. काल सं० १७८५ । पूर्ण । बेष्टन सं० २६३ ।
विशेष-निम्न संग्रह है-- (१) तत्वायं सूत्र टीका-पत्र १०२ तक । रचयिता-अज्ञात । (२) अनित्य पच्चीसी-भगवतीदास (३) ब्रह्मविलास-भगवतीदास–पत्रसं०६६ । र० कास सं० १७५५ ।