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________________ : ३४८ ] प्राप्ति नहीं होकर 'वि' ही कायम रहकर और शेष साधनिका प्रथम रूप के सामान ही होकर द्वितीय भी सिद्ध हो जाता है । रूप * प्राकृत व्याकरण तृतीय रूप में सूत्र संख्या २७६ से द्वितीय 'ब' का तो और ३-२ से प्रथमा विभक्ति के एक वचन में अकारान्त पुल्लिंग में सि' अत्यय के स्थान पर 'ओ' प्रत्यय की प्राप्ति होकर विहलो रूप भां सिद्ध हो जाता है ॥२-५८ वोवें ॥२- ५६॥ ऊर्ध्व शब्दे संयुक्तस्य भो भवति ।। उन्भं उद्ध' ॥ अर्थः – संस्कृत शब्द 'ऊ' में स्थित संयुक्त व्यञ्जन 'ध्व' के स्थान पर विकल्प से भ की प्राप्ति होती है । जैसे- ऊर्ध्वम् उभं अथवा उद्धं ।। में सूत्र संस्कृत रूप है । इसके प्राकृत रूप उभ और उदूध होते हैं। इनमें से प्रथम रूप की प्राप्ति २.५१ से संयुक्त की प्राप्ति २-६० से प्राप्त संख्या १-८४ से आदि में स्थित दीर्घ स्वर 'ऊ' के स्थान पर ह्रस्व स्वर 'उ' व्यञ्जन 'व' के स्थान पर 'भ' की प्राप्ति २८६ से प्राप्त 'भ' को द्वित्व 'भूभ' पूर्व 'भू' को 'ब' की प्राप्ति; २-७६ से रेफ रूप 'र' का लोपः ३ २५ से प्रथमा विभक्ति के एक वचन में अकारान्त नपुंसक लिंग में 'सि' प्रत्यय के स्थान पर 'म्' प्रत्यय की प्राप्ति और १-२३ से प्राप्त 'म्' का अनुवार होकर प्रथम रूप उब सिद्ध हो जाता है। द्वितीय रूप में सूत्र संख्या १-८४ से दीर्घ स्वर 'ऊ' के स्थान पर हस्व स्वर 'उ' की प्राप्ति २०७४ से 'र' और 'य' दोनों का लोपः २८६ से शेष 'ध' को द्वित्व घ्ध' की प्राप्तिः २ -१० से प्राप्त पूर्व 'धू' को 'दृ' को प्राप्ति और शेष साधनिका प्रथम रूप के समान ही होकर द्वितीय रूप उ भी सिद्ध हो जाता है । कश्मीरे म्भो वा ॥ २६०॥ कश्मीर शब्दे संयुक्तस्य भो वा भवति ॥ कम्भारा कम्हारा | अर्थ :- संस्कृत शब्द 'कश्मीर' में स्थित संयुक्त व्यञ्जन 'एम' के स्थान पर विकल्प से 'भ' को प्राप्ति होती है। जैसे- कश्मीरा -कम्मारा अथवा कम्हारा ॥ कश्मीराः - संस्कृत रूप है। इसके प्राकृत रूप कम्भारा और कम्हारा होते हैं। इनमें से प्रथम रूप में सूत्र-संख्या २-६० से संयुक्त व्यञ्जन 'श्म' के स्थान पर त्रिकल्प से 'म्भ' को प्राप्तिः १-१०० से दीर्घ स्वर 'ई' के स्थान पर 'आ' की प्राप्ति; ३-४ से प्रथमा विभक्ति के बहुवचन में अकारान्त पुल्लिंग में 'जस्' प्रत्यय की प्राप्ति होकर लोप: और ३-१२ से प्राप्त एवं लुप्त 'जस' प्रत्यय के कारण से अन्तिम हस्व स्वर 'अ' को दीर्घ स्वर 'आ' की प्राप्ति होकर प्रथम रूप कम्भारा सिद्ध हो जाता है ।
SR No.090366
Book TitlePrakrit Vyakaranam Part 1
Original Sutra AuthorHemchandracharya
AuthorRatanlal Sanghvi
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages610
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari & Grammar
File Size17 MB
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