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________________ प्रद्युम्न द्वारा प्राप्त विद्याओं के नाम विद्या सोलह लइ प्रविचार, चम्बर छत्र सिर मुकट अपार। मागसेज जा रयणी नशे, भरगी कपड वीणा पावडी ॥२३॥ विजयसंख कोसाद अपार, चंद्र संघासण सेखण हार । सोहइ हाथ काममुदरी, पहुपचाप कर कडिहा छुरी ॥२३४॥ कुसुमुवाण कर हाथह लेइ, कुडल जबल सम्बण पहेरइ । राजकुवरि दुइ परिणइ सोइ, चढि गैयर फुणि उभौ होइ ।।२३५॥ कंकरण जुगल रयणि अनिवार, अर द्वइ लेइ पुष्प की माल । न्हानी वस्त गण तह कवणु, इतनउ लेनि चलउ परदवणु ॥२३६॥ - मयण कुवर घर चल्यो तुरंत, मेघकूट खण जाइ पहुत । जमसंवरु भेटिउ तिहि ठाउ, बहुत भगति करि लागो पाइ ॥२३७॥ भेटि राउ फुणि उभो भयो, मयगु कुबरु रणवासह गयो । कनकमाल खरण भेठी जाइ, वहुत भगति करि लागो पाई ॥२३८॥ (२३३) १. जे सुविचार (क) २. सो (क) जा (ख) . रयणहि (ख) रपरगह (क) ४, जडी [क ख) ५. प्रगनि (क ) ६. कपटु (ख) (२३४) १. कोसार (क) उसबा (स्त्र) २. सेरथर (क) ३, "संघासण (क) ३. मुंबडी (क ख) ४. कडि (क) (२३५) १. युगल (क) झुगलु (ख) २. श्रवण (क) सबरणह (ख) ३. जाा (क) ४. गइपर (ख) ५. जभउ (क ख) (२३६) १. बुद्ध (क ख) २. पुहप (क ख। ३. वस्तु (क) वसतु (ख) ४. गिण (क) गणइ (ख) ५. इह (क ख) तिहि (ख) ६. एती (क) इतर (ख) ७. ले (क) लाई (ख) म. घालिउ (क) निकलिड (ख) (२३७) १. मेघ कुटिल (क) २. सो (ग) खरिण (ख) खिरिण (क) ३. पाह (क) ४. काल (ग) ५. नइ बइठउ प्राइ (ग) ६. तिह भा (ख) ७. लागिज (ब) (२३८) १. राव (क) २. पुरिण (क) तब (ग) ३. उभउ भयउ (क ख ग) ४. फुरिणवि मयण (ग) ५. करणयमाल (कल) ६. भेट तिह (ग) ७. लागउ (क) लागी (ख) मा (ग)
SR No.090362
Book TitlePradyumna Charit
Original Sutra AuthorSadharu Kavi
AuthorChainsukhdas Nyayatirth
PublisherKesharlal Bakshi Jaipur
Publication Year
Total Pages308
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size5 MB
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