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पउमचरित
ताणन्तरें भढ-कदमहणाहुँ ।
गीसरियड दहमुह-जन्दणाहुँ ॥९॥
(पहिया णाम छन्दो)
घन्ता
रहसुच्छलियहुँ रण रसिपडूनहुँ, पखस-धय? विमाणारूहुँ । इन्दइ-घणवाहण-मुझ-सारहुँ । पञ्च-अद-कोडीउ कुमारहुँ ॥१०॥
[१०] गय रण-भूमि जा(म] पश्चियई वाहणाई ।
थिउ बस्लु विस्थरवि पचास-जोयपाई ॥१॥ ( हेलादुबई) विमाणं विमाणेण छत्तेण कसं। धयगं धपग्गेण चिन्धेण चिन्ध ॥२॥ गइन्दो गइन्देण सीहेण सीहो। तुरको तुरनेण घग्घेण षग्यो ॥३॥ जणाणन्दणो अम्दणी सन्दगेणं । परिन्दो गरिन्देण जोहण जोहो ॥४॥ तिसूलं तिसूलेण खगोण खग्गं । वले एकमण्णोपण-बहिजमाणे ॥५॥ कहिम्पि प्पएसे विसूरन्ति सूरा। रण के चिरके चिरा वीर-कच्छी ॥६॥ कहिम्पि पएसे विमाणेहि धन्तं । मडा सूरकन्तहि जाणन्ति अण्णं ॥७॥ कहिम्पि पएसे सुपाखेननला गहन्दाण कपणेहिं पावन्ति वार्य ॥८॥ सहस्साइँ ससारि मक्खोहणीहि । बले इस्थ पम्पिा करस सत्ती ॥२॥
( भुषङ्गप्पयामओ णाम छन्दी)
घत्ता हस्थ-पहस्य ठवेप्पिणु अगा, राषणु देइ दिष्टि णिय-खग्गएँ । गं खय-काल जगहों भारूस वि। थिइ सङ्गाम-ममि स ई भू वि ।।१०॥