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________________ मनोरंजन : १३५ १२-क्षणभर में पास आ जाना । १५९ १३ क्षणभर में दूर पहुँच जाना । १५० १४.क्षणभर में दृश्य हो जाना। १५-क्षणभर में अदृश्य हो जाना ।५२ १६-क्षणभर में महान् हो जाना । ६ १७-क्षणभर में सूक्ष्म हामा ।१६४ १८-क्षणभर में भयंकर दिखाई पड़ना ।११५ १९-क्षणभर में भयंकर नहीं रहना । ६६ विविध मनोरंजन उपर्युक्त मनोरंजन के अतिरिक्त पनपरित में अन्य मनोरजनों का भी उल्लेख मिलता है जो कि समय-समय पर मनोबिनोद के लिए अपनाये गये थे। बानरों का अभिनय, उनका उछलना-कूदना आदि सदा ही लोगों के मनोरंजन का विषय रहा है । राजा श्रीकण्ठ जब बानरद्वीप में पद्माभा के साथ बिहार कर रहे थे तो उन्होंने इच्छानुसार अनेक बानर देखे । १५० राजा श्रीकण्ठ ने बानरों के साथ क्रीड़ा की। कभी बह ताली बत्राकर उन्हें नचाता था, कभी अपनी भुनाओं से उनका स्पर्श करता था और कभी अनार के फूल के समान लाल तथा चपटी नाक से मुक्त एवं चमकीली सुनहली कनोनिकाओं से युक्त उनके मन में उनके सफेद दाँत देखता था ।१५६ बानर परस्पर विनय से युक्त हो एक दूसरे के जुये अलग करते थे। प्रेम से खो-खो शब्द करते हुए ये मनोहर कलह करते थे ।१६५ राजा धोकण्ठ ने उनका बड़े प्रेम से स्पर्श किया तथा उन बानरों के कृश पेट पर जो रोम अस्तव्यस्त थे, उन्हें उसने अपने स्पर्श से ठोस किया। साथ ही उनकी मौहों को तथा रेखा से युक्त कटाक्ष प्रदेशों को कुछ-कुछ ऊपर की ओर उठाया। इस प्रकार क्रीड़ा करते हुए उसने प्रीतिपूर्वक बहुत से यानरों को मधुर भन्न-पान आदि के द्वारा पोषण करने के लिए सेवकों को दिए । १७० १५९. पत्र. ८1८८ । १६१. वही, ८1८९। १६३, यही, ८८९ । १६५. वही, ८८९ । १६७. वही, ६।१०७ । १६९. वाही, ६१११५ । १६०. पन ८1८९ । १६२. वही, ८०८९ । १६४. वही, ८८९ । १६६. वही, ८1८९ । १६८, वही, ६।११३, ११४ । १७०. वही, ६।११७-११९ ।
SR No.090316
Book TitlePadmcharita me Pratipadit Bharatiya Sanskriti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRameshchandra Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages339
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Mythology, & Culture
File Size6 MB
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