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________________ निमित्तशास्त्रम ---- ८० मेघयोगप्रकरण अहमग्गासिर देवेवरसइजत्थेय देस णयरम्मि। सोमुयइजिट्टमासेसलिलंणियमेणतत्थय।।१६३॥ अर्थ : यदि मार्गशीर्ष माह में पानी बरसे तो जेठ माह में पानी का अवश्य नाश होगा। अहपोसमास वरिसइ विज्जलउणहयलम्मिजइ देवो। छट्टेमासे वरिसइ बहुयंचवपुचएतत्थ||१६४|| अर्थ : यदि पौष मास में बिजली चमकते हुए पानी बरसे तो आषाढ़ माह र से में अच्छी बरसात होगी। अहमाहफम्गुणेसुयदीतीणभियाउअभाउ। ई छ उणवउ मासे वरिसइदेमुत्तिणायव्वो॥१६५॥ अर्थ : माघ और फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष में यदि लगातार तीन दिन वर्षा हो तो छठे माह या नौवें माह में पानी अवश्य बरसेगा। अब्भाणेमेहपत्तीकालेकालेजहापयासिज्ज। में तोहोहदिवाहिभयं वासररत्तेण संदेहो॥१६६॥ अर्थ : यदि आकाश में बादल छाये रहे और प्रति समय बरसते रहे तो वहाँ पर रात-दिन व्याधि रहेगी । इसमें किसीप्रकार का सन्देह नहीं है। अह कित्तियाहिवरसइ सरसाणविणासणोहवइ देवो।
SR No.090300
Book TitleDavvnimittam
Original Sutra AuthorRushiputra Maharaj
AuthorSuvidhisagar Maharaj
PublisherBharatkumar Indarchand Papdiwal
Publication Year2003
Total Pages133
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size3 MB
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