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Plea
निमित्तशास्त्रम्)
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अनुसार बनायी जाती है। उनमें विकृतियों का आना अनिष्ट का सूचक है। इस प्रकरण में इसी अनिष्टों का विस्तृत वर्णन किया गया है ।
तीर्थंकर का छत्र भंग होने से राज्य का विनाश होता है। तीर्थकर का रथ टूटने से राजा का मरण होता है और छठे माह में राज्य का नाश होता है। तीर्थंकर का सिंहासन गिर पड़े तो तीन माह में राजा की मृत्यु, होगी। तीर्थंकर के आमण्डल का भंग होने से तीन से पाँच माह के अन्दर राजा को मारणान्तिक कष्ट होगा ।
जिनप्रतिमा का हाथ टूटने से तीन माह में राजकुमार की मृत्यु होगी। जिनप्रतिमा का पैर टूटने से सातवें माह में प्रजा को अपार कष्ट होगा। जिनप्रतिमा का मस्तक भंग हो जाय तो एक माह में राजा के प्रधान पुरुष की मृत्यु होगी। जिनप्रतिमा की भुजा टूट जाने से मनुष्यों, को घोर पीड़ा होगी। तीर्थंकर की प्रतिमा से आग निकलने घर नगर में; अग्नि और चोरों का भय होगा और तीसरे माह में राजा की मृत्यु होगी। ये उत्पात लगातार पन्द्रह दिनों तक होते रहे तो उस नगर में, अकाल का भय रहता है।
प्रतिमा रोते हुए दिखाई देवे तो राजा की मृत्यु होगी । प्रतिमा हँसते हुए दिखाई देवे तो राज्य में महान विद्वेष का प्रसार होगा। प्रतिमा चलती हुई और काँपते हुई दिखाई देवे तो उस देश में महासंग्राम होगा । शिव की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो ब्राह्मणों का नाश होगा। कुबेर की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो वैश्यों, का नाश होगा। इन्द्र की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो राजा का नाश होगा। कामदेव की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो आगम के वाक्यों की हानि होगी। कृष्ण की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो मनुष्यों को अपार कष्ट होगा। अरिहन्त अथवा सिद्ध की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो मनुष्य जाति की अत्यधिक क्षति होगी। बुद्ध की प्रतिमा से धूआँ सहित पसीना निकले तो मनुष्य, जाति की हानि होगी । कुबेर की प्रतिमा के कन्धे से धूआँ सहित पसीना निकले तो भोइयों का नाश होगा। कुबेर की प्रतिमा के हाथों से धूआँ 'सहित पसीना निकले तो कायस्थों का नाश होगा। विश्वकर्मा की मूर्ति से विकृति के दर्शन होने पर शिल्पियों को कष्ट होता है। धन्वन्तरी की.