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________________ लिमितशास्त्रम [२० ---- ---लिमितशारप्रम----- उत्पातयोगप्रकरण अह अंतरिक्स रायो सुव्वइ बहुशाणले युरिसाणं! पंचममासे मारी होई देसे ण संदेहो॥४४|| अर्थ: जिस देश में अनेक मनुष्यों की आवाज सुनाई देवे परन्तु बोलने के दाले दिखाई न देते हो तो ऐसा निश्चित् समझाना चाहिये कि उस देश में 2 * पाँचवें माह में मारी की बीमारी होगी। अह बहु सति धावंति सवदो जुज्झणुपवदंति। रोवाराव कुणंता भूया लोयरस णासाय॥४५॥ अर्थ : जिस देश में अनेक मनुष्यों के दौड़ने और लड़ने की आवाजें ज्ञात हों अथवा रुदन का शब्द सुनाई दे तो यहाँ हजारों मनुष्यों का नाश होगा ऐसा जानना चाहिये। ई संझावेलासमये रवयं सिवा चउदस गामपासेसु। कहदिग्गामुपाद रस्थिविणासंणसंदेहो॥४६|| अर्थ : यदि संध्या की बेला में गीदड या लोमड़ी गाँव के चारों ओर रोवे तो ऐसा जानना चाहिये कि राजा का मरण होगा। मज्झण्णेपरचक्कंसंझाए कुणइरोगवाहिभयं। सेसेसुसिवाकालेरोवंती सोहना रत्ती॥४७॥ अर्थ : यदि अर्द्धरात्रि के समय में गीदड़ रोवे तो परचक्र के भय की सूचना माननी चाहिये । यदि शाम के समय गीदड़ रोवे तो रोग और
SR No.090300
Book TitleDavvnimittam
Original Sutra AuthorRushiputra Maharaj
AuthorSuvidhisagar Maharaj
PublisherBharatkumar Indarchand Papdiwal
Publication Year2003
Total Pages133
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size3 MB
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