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________________ निमित्त शास्त्रम् होवे कि सूर्य से अग्नि की चिनगारियाँ निकल रही हैं तो उस देश में हर प्रकार से विनाश होगा ऐसा निवेदन करना चाहिये । अह णिप्पहोव दीसह उच्छंतो धूलिधूसरो छायो । सो कुणइ राइमरणं वरिसदिणभंतरे सूरो ॥११॥ अर्थ :~ यदि सूर्यास्त के समय ऐसा लगे कि सूर्य से धुआँ निकल रहा हो या धूलि निकल रही हो तो एक वर्ष के अन्दर उस देश के राजा की मृत्यु होगी ऐसा जानना चाहिये । उदयच्छमणे सूरो वक्को इव दीसए णहयलम्मि | सो अइरेण य साहदि मंत्तिवह रायमरणं च ॥ १२॥ अर्थ : यदि सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य की आकृति टेढी बालुम हो तो राजा या मन्त्री का मरण अवश्य होगा ऐसा समझो । जइ मच्छासरिमेणं मज्झे णयमयरणुवि अढभेण । ठायज्जइ उट्टंतो लोयस्स भय णिवेएइ ॥ १३ ॥ अर्थ : सूर्यास्त के समय यदि सूर्य के भीतर से जाज्वल्यमान मछली के आकार का उठता हुआ चिह्न दिखाई पड़े तो वह मनुष्यों के लिए भय का कारण होता है। रणूवेण भेणं गीढो जइ दीसए समुठ्ठेतो । जं देसम्म जे दीसइ छम्मास विणासएणं च ॥१४॥ अर्थ : सूर्य से लम्बी ज्वाला उठती हुई दिखाई पड़ती हो तो छह मास के भीतर-भीतर देश का विनाश हो जायेगा ।
SR No.090300
Book TitleDavvnimittam
Original Sutra AuthorRushiputra Maharaj
AuthorSuvidhisagar Maharaj
PublisherBharatkumar Indarchand Papdiwal
Publication Year2003
Total Pages133
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size3 MB
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