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________________ S मूलाराधना RO সাস্থা मूलारा-पुनधि पूयित्रीकायिकाः । अगणि तेज:कायिकाः पत्रपणे वात कायिकाः। पी पीजभूना त्रनम्पनिगायिकाः । एवं पसेयं प्रयोगाः । गतकाये अनंतकायिकाः साधारगाः विवादि विविधतुःपद्रियमत्वातामारंभ विराधने । एतत्पृथिव्यादिभिरपि योज्यं । अणेयविधे अनेकप्रकारे । तथा हि-पृधिग्या मुतिकोपलशर्करासिकतालवणवकादिकायाः खननबिलेखनदहनकुटनभंजनादिक आरंभः । उदककरकाय नायतुपारादीनामभेदानां पानस्नानायगाइन तरणहस्तादिमर्दनादिकः । अमिज्वालाप्रदीपोल्मुकादिकस्य तेजस: उपर्युदकपाषाणमत्तिकासिकतादिप्रक्षेपणपाषाण काष्ठादिहननादिकः। झंझामंडलिकादिवातस्य कपाटछ वादिना प्रतिबंधः । व्यजनादिना वा तस्य करण वातेवाभिगमनमित्यादिको वायुभेदानां । वृक्षवल्लीलतागुल्म तृणपुष्पफलादीनां दहनछेदनताडन धरोधनादिकः । आओ..-नी, बल. गति हवा, बीज, अनंतकायिक वनस्पति, प्रत्यककाय वनस्पति, द्वींद्रिय, वांद्रिय, चतुरिद्रिय, पंचेंद्रिय इन प्राणिओंका वध पदि मेरेसे हुआ होगा तो में उस की आलोचना करता हूं. पृथिवीके अनेक प्रकार हैं. जैसे-मृत्तिका, पाषाण, शर्करा, बालुका, नमक, अभ्रक वगैरह पृथ्वीके भेद हैं. इत्यादिरूप पृथ्वीको खोदना, हलसे चिदारण करना, जलाना, फोडना, मोडना इत्यादिरूप से मैंने उनका नाश किया होगा. पानीके भी बहत भेद है जैसे-पानी, बर्फ, ओस, हिमाबिदु वगैरह पानीके भेद हैं. इनका पान करना, म्नान करना, उसमें कूदकर स्नान करना, तीरना, हाथ, पाव, और शरीरसे मर्दन करना इत्यादिरूपसे मैंने उनका नाश किया है. अनिके ज्वाला, दीपक, उन्मुक इत्यादि भेद है. इनके ऊपर मने पाषाण, मृत्तिका अथवा वाटका फककर इनका नाश किया होगा, पाषाण और लकड़ी से उसको पीटा होगा. इत्यादिरूप आरंभ मन किया होगा. वायुके झंझावात, मंडलिक ऐस भेद हैं. जलवृष्टि सहित जो वायु बहती है उसको झंझावात कहते हैं, जो वर्तुलाकार भ्रमण करती है उसको मंडलिक वायु कहते है. इस प्रकार वहनेवाले वायु को मैने पंखेसे, सूपसे और वनसे रोका होगा, उसको उत्पन्न किया होगा, बातके सम्मुख गमन किया होगा. वनस्पती-बीज, अनंतकायिक, प्रत्येककायिक वृक्ष, वल्ली, छोटे छोटे पेडोंका समूह, लता, तण, पुष्प, फल
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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