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________________ मूलाराधना 2012 मूलारा-बसणम्मि आपदावर्ते ॥ अर्थ यह ध्यान संक्लेशयरिणामरूप श्वापदोस मुनिऑकी रक्षा करता है. जैसे श्वापदों के भयसे हम अपनी रक्षा कर लेते हैं. जैसे संकटों में मित्र सहायक होकर संकटों से बचाता है वैसे संक्लेश परिणामरूप संकटोंसे ध्यान आत्माका रक्षण करता है. ज्झाणं कसायवादे गम्भघरं मारुदेव गभ्भधरं । झाणे कंसायउपहे छाही छाहीव उपहम्मि ॥ १८९८ ॥ झाणं फंसायडाहे होदि वरदहो दहोब डाहम्मि ॥ ... झाणं कसायसीदे अग्गी अग्गीव सीदम्मि ॥..१८९९ ॥ . . . ... सी. कसारालादानए एलरहदो . ": 1: परचक्कभए। बलवाहणढओ होइ जह राया ॥ १९.. । ........ .... . .. .. झाणं कसायरोगेसु होदि बेज्जो तिगिछिदे कुसलो ।। ... रोगेसु जहा वेज्ज़ो पुरिसस, तिगिछिदे कुसलो. ॥ १९०१ ॥ झाणं विसयछुहाए य होइ.. अण्णं जहा छुहाए वा ।। . . . . . . ... झाणं विसयतिमाए उदयं उदयं व तण्डाए । १९०२ ॥ कषाया/तपे छाया कषायशिशिरेऽनलः ।। कषायारिमये याणं कषायन्याधिभेषजम् ॥ १९६१ ॥ तोयं विषयतृष्णायामाहारो विषयभुवि ।। जायते योगिनो ध्यानं सर्वोपद्रवसुदनम् ॥ १९६२॥ स्पार्थोसरगाथा ।
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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