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________________ अशुद्ध पृष्ठ पंक्ति शुद्ध ३६२ २८ सहिखोपकरण ३६३ ।। उद्योग ३६३ २२ निममत्वाय सर्वहिसोपकरण उद्यम निर्भमत्वाय | पृष्ठ पंक्ति शुद्ध | ३९८ २४ निर्विकल्पक ३९९ १ माक्षमार्ग २९९ २४ सगोत्थ ४००१४ चतुरगुल ४०२ : वासी ०२ १७ करता ४०५ १३ इर्या ४०.२० बनना वेला ३६४ १५ वेमा ३६४ २६ साहस्थो २६५ ४ हपाशात ३६६ १६ जा पाहार ३६७ २३ प्रसिद्ध निर्विकल्प मोक्षमार्ग संगोत्थ चतुरंगुल बालो पौर स्त्री भारता है ईया बनाना सदयस्पो समाजात जो पाहार प्रसिद्धि है अमृत के प्रों का प्रसिरि की अपाय बालो समारी ३६८ १ है पनत के ३६८ ६ पर्यों को ३६८ १३ प्रसिद्ध ३६६ १२ ऐसे ही ऐसे ३६६ १५ पात हानये ३७० २ सेवम नहीं ३७. + शुक श्रोणित ३७१ ८ पापयोजे ३७१ १३ छद्धिरूलबाह्या ३७१ १९ वयले सारं ३७७७ लिये की ३७६ ५ जिनज्ञा ३७६७ पचक्ष ऐसे पाप हानये सेवन ही णूक शोणित बन्यम् सी हप्ती ब्राषि तस्थावरा पाप बीज छुद्धिरूज्झमाह्या अमतेसारं लिये जिनाज्ञा पंचाक्ष ४.९ ३ प्रवश्य ४०९ २३ वालो ४११६ संसार ४१४ २ वर्ष ४१६ ४ इसी ४१६ १५. हंसी ४१७ २६ बाधि ४१. ५ बिसस्थावरा ४२. ३ ज्ञानाराधना ४२१ १७ पामेंगादयो भावा ४२२२ मूलने ४२३ २ प्रासादनामों का २३ १. मुनि का ४९८ १० मूल कारण ४३०३ जाने ४३४१ प्रमाद से ४६७ १६ पृथ्वप ४३८ २५ सपन के ४३९ २४ प्रतिकाए मेक ४. ७ इकाईस प्रामाराधना की शेषामंगाइयोभावा मुलेन मासादानों को मुनि को मात्र मूलकारण ३७१ २५ शत्र ३.३ २६ जानकार जानकर सकता है ३८४ २६ सकती है ३८७ १२ वह वह जाने देवा प्रासाद में বৃন্মথ सेवा के मतिकरण मेव ३८७ १३ रसवेगा रखेगा ३९८ ७ परिनतनम परिवर्तनम् इकतीस [ ५७ ।
SR No.090288
Book TitleMulachar Pradip
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages544
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size14 MB
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