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________________ । पृष्ठ पंक्ति शुद्ध प्रशुद्ध अशुद्ध प्रकुर्वते मुक्तिपूरी ४७२ ४ मोह ४७६ ३ वाले की क्षमा मोह के कारण वाले को दुर्लभ ध्यानारचलेन षष बंधन वध परिषह रत्नखानी पृष्ठ पति शुद्ध ४. १३ प्रकुषते ४४३ २६ मुक्तिपणे ४४४१८ असा ४४४ १८ रस्मस्वनी ४४७४ मत ४४६ २७ भाम ४४९ ६ शरीरबागातजसेन । ४५० १. शुभकरा ४५२ ७ बम लक्षणम् ४४२ १४ मृशुचिते ४१६ २५ मतिचार ४६१ २५ इच्छदया ४६२ ९ समादि लक्षा ४६५ ६ संकल ४६१ १४ जीवात्सचेन्द्रिमा भाक्रान्त आमम् शरीरंचागस्तंजसेन शुभेकरा धर्म लक्षणम् मृदुमिसे अतिचार का बग्छुखया अमादि लक्षण सोकल जीवात्पचेन्द्रिया ४५१ २३ ध्यानचनेन्न ४८४ १३ बध बंधन ४८४ १३ बच परिषह ४.९ १७ यव ४९० १ हसी ४९१ ५ सभिल ४६२ ५ विऋिषद्धि ४९२ १० मन्तघान ४६४ १३ प्राप्त करें ४९५ १८ रत्नों का YEE २२ तोयनाथा हसो संमिन विक्रिर्याद्ध अन्तर्धान प्रदान करें रत्नों की तीर्थनाथा । ५८ 1
SR No.090288
Book TitleMulachar Pradip
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages544
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size14 MB
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