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________________ ३, १५८ पद्धं पुद्गलपरावर्तन । अलब्धपूर्व अल्पबहुस्वदण्डक अबरोहक अविभागी प्रतिच्छेद प्रविमर्शक नवेदक अथद्वानभाग भष्टांक २५७ २२२, १५२ २५ । २४० उत्कृष्ट स्थिति सत्त्व उत्तर (चय) २२६ उत्तरधन उत्पादानुच्छेद २०८, २०६, २१७ उदयादिअवस्थित गुणने रिण पायाम १२० उदयादि गुणश्रेणी ११३, १२६ उदयाभाव उदयावलि बाह्य १०६ उदीरणा उदोर्ण उद्घाटित २५३, ९८१ उलना ज्वलना काल उपयोग उपरिमस्थिति उपशम "शा" २४६ भागाल ७२, २०८ ७२, २०८ प्रागाल-प्रत्यागाल मानुपूर्वी संक्रमण आन्तरिक स्थितियां माबाधा ३०६ १८, १३८ मायाम १९६ उपशमकरण मायुक्तकरण यारोहक पावली-प्रत्यावली माहारक चतुष्क २५७ २५३ १७३ २६ २१२ उपशमकालक्षय निबन्धन उपशमावलि उपशामक उभमद्रव्यविशेष उर्वक ७१ ईषन्मध्यमसंक्सेशपरिणाम २१२, १११ ऊहापोह एकान्तानुवृद्धि संग्रस उच्छिष्टावलि उत्कर्षण उत्कृष्ट अनुभाग बन्ध उत्कृष्ट अनुभाग सत्त्व उत्कृष्ट कर्म संचय उत्कृष्ट प्रदेश सत्व उत्कृष्ट स्थिति बन्ध Wn. प्रौदपकभाव " " ८ । करप
SR No.090261
Book TitleLabdhisar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Shastri
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages644
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, Philosophy, & Religion
File Size16 MB
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