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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir यह संग्रह चार अध्यायों में विभक्त किया गया है। पहला अध्याय नित्यक्रियाप्रयोगविधि नाम का है। उसमें दिखाई गई प्रयोगानुपुर्वी मूलाचार, चारित्रसार, आचारसार, अनगारधर्मामृत, हरिवंशपुराण, पद्मपुराण आदि प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हमने संग्रह की है। प्रारंभ का कृतिकर्म, देववन्दनाप्रयोगविधि, और देववन्दनाप्रयोगानुपूर्वी के सानुवाद पाठ का संग्रह, हम इस संग्रह के प्रकाशन का भार हमारे ऊपर श्राने के पूर्व ही कर चुके थे। जयपुर चातुर्मास के समय हमने उसको मुनियों की सेवा में उपस्थित किया। जिसको देखकर सभीसंघने मुक्तकंठ से प्रशंसा की । कुछ समय के बाद इस संग्रह के प्रकाशित करने का भार हम पर आया तो उसमें वह पाठ भी ज्यों का त्यों सानुबाद रख दिया । क्योंकि मुनियों की दैनिकचर्या देववंदना या सामायिक से ही प्रारंभहोती है। प्राचीन संकलित एक सामायिक पाठ है । उस पर प्रभाचन्द्रा. चार्य कृत एक टीका है । व्यावर-भवन की सूची में सामायिक-भाष्य की दो प्रतियों का उल्लेख है। उनके कती का नाम विश्वसेन है। तीसरी प्रति और है,संभवतः उसमें कर्ता का नाम नहीं है। अवकाशाभाव के कारण हम इनका मिलान नहीं कर सके। प्रभाचन्द्राचार्यकृत टीका हमने देखी है परंतु वह इस समय हमारे पास नहीं है । एक दूसरी टीका पुस्तक हमारे पास है, उसमें कर्ता का नाम नहीं है। उसके अन्त में 'इति सामायिकभाष्यं समाप्तं । श्री : । सामायिक सर्व श्री प्रभाचन्द्रविरिचिताः टीका ब्रह्मसूतसागरविरचिता टीका मिभी करता लक्षताः' ऐसा लिखा है। इस पर से मालूम होता है कि उस पाठ पर ब्रह्मसू (भु) तसागरविरचित भी कोई एक टीका है। एवं तीन या चार उस पर संस्कृत टीकाएं हैं । स्वर्गीय पं० जयचन्दजीकृत हिंदी भाषा में एक अनुवाद' भी उस पर है। इन सब का पाठ एकसा ही है या भिन्न भिन्न है ? यह __१--यह अनुवाद मूल सहित अनन्तकीर्ति प्रन्थमाला में छप धुका है। For Private And Personal Use Only
SR No.090257
Book TitleKriya Kalap
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Shastri
PublisherPannalal Shastri
Publication Year1993
Total Pages358
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, Religion, & Ritual
File Size15 MB
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