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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir नैमित्तिकक्रियाप्रयोगविधिः। ४४.४~~~~wwwwwwwwwwwwwwnnanomwww १५-मंगलगोचरमध्याह्नवन्दनाक्रिया अथ मंगलगोचरमध्याह्नवन्दनाक्रियायां इत्येवमुच्चार्य क्रमेण सिद्धभक्ति--चैत्यभक्ति--पंचगुरुभक्ति--शान्तिभक्तयो विधेयाः । १६-मंगलगोचरवृहृत्पत्याख्यानक्रिया 'लात्वा बृहत्सिद्धयागिस्तुत्या मंगलगोवरे। प्रत्याख्यानं बृहत्सूरिशान्तिभक्ती प्रयुअताम् ।। अथ मंगलगोचरभक्तप्रत्याख्यानक्रियायां.........सिद्धभक्तिकायोत्सर्ग करोमि-('सिद्धानुद्भूत' इत्यादि) अथ मंगलगोचरभक्तप्रत्याख्यानक्रियायां ....... योगिभक्तिकायोत्सर्ग करोमि-('जातिजरोरुरोग' इत्यादि) ( इत्येवं भक्तिद्वयेन प्रत्याख्यानं गृहीत्वा इदं भक्तिद्वयं प्रयुञ्जताम् ) अथ मंगलगोचरभक्तप्रत्याख्यानक्रियायां............आचार्यभक्तिकायोत्सर्ग करोमि-('सिद्धगुरुस्तुति' इत्यादि) ___ अथ मंगलगोचरभक्तप्रत्याख्यानक्रियायां.........शान्तिभक्तिकायोत्सर्ग करोमि (शान्तिभक्तिः) १-मंगलगोचर में बड़ी सिद्धभक्ति और बड़ी योगिभक्ति द्वारा भक्तप्रत्याख्यान ग्रहण करके बड़ी आचार्यभक्ति और शान्तिभक्ति को आचार्यादिक सब मिल कर पढ़ें। For Private And Personal Use Only
SR No.090257
Book TitleKriya Kalap
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Shastri
PublisherPannalal Shastri
Publication Year1993
Total Pages358
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, Religion, & Ritual
File Size15 MB
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