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________________ कर्मभूमि से सम्बद्ध लवणोद, कालोद और अन्तिम स्वयम्भूरमण समुद्र में ही जलचर जीव हैं। शेष समुद्रों में नहीं हैं १४४. प्रश्न: द्वीप समुद्रों का विस्तार कितना है ? - उत्तर : जम्बूद्वीप का विस्तार एक लाख योजन है। इसके आगे लवण समुद्र से लेकर स्वयम्भूरमण समुद्र पर्यन्त द्वीप - समुद्रों के विस्तार क्रमशः दुगुने - दुगुने हैं। १४५. प्रश्न: जम्बू द्वीप की परिधि कितनी है ? उत्तर : जम्बूद्वीप की स्थूल परिधि ३ लाख योजन और सूक्ष्म परिधि ३,१६,२२७ योजन, ३ कोस, १२८ धनुष और साधिक १३३ अंगुल है । १४६. प्रश्न: परिधि निकालने की विधि क्या है ? उत्तर : विस्तार का जितना प्रमाण है उसका वर्ग कर दस गुणा करने के पश्चात् उसका वर्गमूल निकालने से परिधि का प्रमाण प्राप्त होता है। १४७ प्रश्न: नन्दीश्वर द्वीप में ५२ अकृत्रिम चैत्यालय किस प्रकार हैं ? उत्तर : एक सौ तिरेसठ करोड़ चौरासी लाख योजन प्रमाण विस्तार वाले अष्टम नन्दीश्वर द्वीप की चारों दिशाओं में एक-एक (६)
SR No.090247
Book TitleKarananuyoga Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages147
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
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