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________________ चतुर्थाधिकार तिर्यग्लोक अधिकार १४०. प्रश्न : स्थावर लोक किसे कहते हैं. ? । उत्तर : धर्म एवं अधर्म द्रव्य से सम्बन्धित जितने आकाश में जीव और पुद्गलों का अवागमन रहता है, उतना अर्थात् ३४३ घन राजू प्रमाण स्थावर लोक है। १४१. प्रश्न : तिर्यग्लोक किसे कहते हैं ? उत्तर : मन्दर पर्वत के मूल से १,००,००० योजन ऊँचाई रूप राजू प्रतर अर्थात् एक राजू लम्बे-चौड़े क्षेत्र में तियग्-त्रसलोक स्थित है अथवा समान धरातल पर स्थित चारों ओर विस्तृत असंख्यात् द्वीप-समुद्रों का समूह तिर्यग्लोक कहलाता है। स्थावरों के साथ त्रस जीव भी इसी क्षेत्र में पाये जाते हैं। १४२. प्रश्न : असंख्यात द्वीप-समुद्रों की संख्या कितनी है और उनकी अवस्थिति किस प्रकार है ? उत्तर : पच्चीस कोड़ा-कोड़ी उद्धार पल्यों के रोमों के प्रमाण द्वीप एवं समुद्र दोनों की संख्या है। इसकी आधी अर्थात् १२१ कोड़ा-कोड़ी उद्धार पल्य प्रमाण द्वीपों की और उतनी ही समुद्रों की संख्या है। (४)
SR No.090247
Book TitleKarananuyoga Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages147
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
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