SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 107
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 5 उत्तर : भरतादिक क्षेत्रों में जिस-जिस काल में जो-जो मनुष्य हुआ करते हैं, उस उस काल में उन्हीं मनुष्यों के अंगुल का नाम आत्मागुल है । इस अंगुल से झारी, कलश, सिंहासन, छत्र, चमर, मनुष्यों के निवासस्थान, नगर व उद्यानादि का प्रमाण मापा जाता है । १७३ प्रपंत किसे कहते है ? उत्तर : अङ्गुल के वर्ग को प्रतरांगुल कहते हैं, जिसमें लम्बाई एवं चौड़ाई विवक्षित रहती है। १७२. प्रश्न : घनांगुल किसे कहते हैं ? उत्तर : अंगुल के धन को घनांगुल कहते हैं, जिसमें लम्बाई, चौड़ाई एवं मोटाई विवक्षित रहती है। १७३. प्रश्न : कृतयुग्म किसे कहते हैं ? उत्तर : जिस राशि में ४ का भाग देने पर कुछ भी शेष न रहे, उसे कृतयुग्म कहते हैं। जैसे- १६ में ४ का भाग देने पर कुछ भी शेष नहीं रहता । १७४. प्रश्न: बादरयुग्म किसे कहते हैं ? उसे उत्तर: जिस राशि में ४ का भाग देने पर २ शेष रहे, बादरयुग्म कहते हैं । १४ में ४ का भाग देने पर २ शेष रहते हैं। (१८)
SR No.090247
Book TitleKarananuyoga Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages147
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy