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________________ वनस्पति के बादर और सूक्ष्म तथा प्रत्येक वनस्पति इन ग्यारह प्रकार के लब्ध्यपर्याप्तक जीवों में से प्रत्येक के ६०१२-६०१२ उत्कृष्ट भव की अपेक्षा एकेन्द्रियों के उत्कृष्ट भव ६०१२ x ११ = ६६१३२ होते हैं। द्वीन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तक के उत्कृष्ट ८० भव, त्रीन्द्रिय लब्थ्यपर्याप्तक के उत्कृष्ट ६० भव, चतुरिन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तक के उत्कृष्ट ४० भव, असंज्ञी लब्ध्यपर्याप्तक के उत्कृष्ट ८ भव, संज्ञी लब्ध्यपर्याप्तक के उत्कृष्ट ८ मव और मनुष्य लब्ध्यपर्याप्तक के उत्कृष्ट ८ भव इस प्रकार का मिला . . काल में उत्कृष्ट ६६३३६ मव होते हैं। : ६८. प्रश्न : लब्ध्यपर्याप्तक, नित्यपर्याप्तक और पर्याप्त अवस्था किन-किन गुणस्थानों में होती है ? उत्तर : लब्ध्यपर्याप्त अवस्था मात्र मिथ्यात्व गुणस्थान में होती है। वह भी सम्मूर्छन जन्म से उत्पन्न होने वाले मनुष्यगति और तिर्यञ्चगति के जीवों के होती है, अन्य जीवों के नहीं होती । नियंत्यपर्याप्त अवस्था मिथ्यात्व, सासादन सम्यक्त्व, 54यक्त्व, आहारकशरीर की अपेक्षा प्रमतविरत (३८)
SR No.090245
Book TitleKarananuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages149
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
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