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________________ ४६ 19 cu ११ १२ १३ ५. ५. Usual retw वेदनीय, आयु और गोत्र कर्म सजतिका प्रकरण ८, ६.१० उपशमणि ६,१० क्षपक ६,१० मतान्तर में 1 ११ उपगामक ११ उपशा १२ द्विचरम समय पर्यन्त मतान्तर से १२ चरम समय में दर्शनावरण कर्म के संवेध भंगों का कथन करने के अनन्तर अब वेदनीय, आयु और गोत्र कर्म के संवेध भंग बतलाते हैं --- वेयणियाजयगोए विभज्जः मोहं परं वोच्छं ॥ ६ ॥ इन भंगों में आठवीं और बारहव भंग कर्मस्तव के अभिप्राय के अनुसार बतलाया है और शेष ग्यारह भंग इस ग्रन्थ के अनुसार समझना चाहिए । २. किन्हीं विद्वान ने वेदनीय, आयु और गोत्र कर्म के अंगों को संख्या बतलाने के लिये मूल प्रकरण के अनुसंधान में निम्नलिखित गाथा प्रक्षिप्त की है(क) गोम्म सत्त मंगा मद्य य भंगा हुवति बेयगिए । पण नव नव पण भंगा आउउनके विकमसो उ ॥ यह गांधा मूल प्रकरण में नहीं है । (ख) वेमणिये अडभंगा गोदे ससेब होंति भंगा हु । पण जव जव पण भंगा आउच उक्केस विसरिया ॥ -गो० कर्मकांड ६५१ वेदनीय के आठ और गोत्र के सात भंग होते हैं तथा चारों आयुओं के क्रम से पाँच, नौ नौ और पांच भंग होते हैं । 1
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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