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________________ सलतिका प्रकरण पहला भंग आयुकर्म के बंधकाल में होता है तथा दूसरा विकल्प आयुकर्म के बंधकाल के अतिरिक्त सर्वदा पाया जाता है 11 चौदह गुणस्थानों के भंगों की संग्राहक गाथायें निम्न हैं एवं विवरण पृष्ठ ३१ की सालिका में लिया: 'मिस्स अपुष्वा बायर सपबंधा छच्न बंधए सुहमो। . ' उवसंताई एगं अंबंधगोऽजोगि एगेगं ।। मिछासायणअविरय सफ्मत्त अपमत्तया चेच । ससऽछ बंधगा पह, उदया, संता या पुण एए॥ जा सुहमो ता अ उ उदए संते य होति पयडीयो। सत्ताधसते खीणि सत्त चत्तारि सेसेसु ॥ इस प्रकार मूल प्रकृतियों की अपेक्षा बंध, उदय और सत्ता प्रकृतिस्थानों के संवैध भंगों और उनके स्वामियों का कथन करने के पश्चात् अब उत्तर प्रकृतियों की अपेक्षा बंध, उदय और सत्ता प्रकृतिस्थानों के संवेध भंगों का कथन करते हैं। पहले ज्ञानावरण और अंतराय कर्म के संवैध भंग बतलाते हैं। उत्तर प्रकृतियों के संवेध भग ज्ञानावरण, अन्तराय कर्म बंधोषयसंतसा नागावरणंतराइए पंच । बंधोवरमे वि तहा 'उपसंता हुति पंचेव ।।६।। १. अष्टविधो बंधः अष्टविध उदयः अष्टविधा सत्ता, एष विकल्प आयुबंधकाले, एतेषां ह्यायुर्वन्धयोग्याध्यवसायस्थानसम्भवाद् आयुर्वन्ध उपपद्यते । तथा सप्तविधो बंधः अष्टविध उदयः अष्टविधा सत्ता एप विकल्प आयुबन्ध कालं मुक्त्वा शेषकालं सर्वदा लभ्यते । --सप्ततिका प्रकरण टीका, पृ० १४५ २. रामदेवगणि रचित सप्ततिका टिप्पण, सा० ८, ९, १० । ३. सुसना कीजिए बंधोदयकम्मंसा णाणावरणंतरायिए पंच ।। बंधोपरमेवि तह! उदयंसा होति पंचेत्र ।। -गो० कर्मकांड ६३०
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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