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सप्ततिका प्रकरण
गुणस्थान
बंधस्थान
उदयस्थान ।
मंग
पहला
७, ८, ६, १०८ पौबीसी
दूसरा तीसरा
बौधा पांचा ६ से 5 नौवा
दसवा
अब आगे की गाथा में इन भंगों की एवं पदवृन्दों की संख्या बतलाते हैं।
नवपंचाणउइसएहदयविगप्पेहि मोहिया जीवा।' अउणत्तरिएमुसरिपविक्सएहि विन्नेया ॥१६॥
१ चउबंधगे वि वारस दुगोदया जाण तेहि पूढेहिं ।
बन्धगभेएणे पंचूणासहस्समुदयाणं ।। -पंचसंग्रह सप्ततिका, गा० २६ २ सप्ततिका प्रकरण नामक षष्ठ कर्मग्रन्थ के टने में यह गाथा 'नवतेसीयसएहि'
इत्यादि के बाद दी गई है।