SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 30
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ U . . . . . RE-१०६ मूल प्रकृतियों में भूयस्कर बंध की संख्या का विवेचन ....६० मूल प्रकृतियों में अल्पनर बंध की संख्या मूल प्रकृतियों में अवस्थित बंध की संख्या . . मूल प्रकृतियों में अवक्तव्य बंध न होने का कारण गाथा २३ १४-६६ भुयस्कार आदि बंधों के लक्षण भूयस्कार मादि बंधों विषयक विशेष स्पष्टीकरण . . ६६ गाथा २४ दर्शनावरण कर्म के बंधस्थान आदि की संख्यां ... ... ... .. मोहनीय कर्म के बधस्थान की संख्या मोहनीय कर्म के भूयस्कार आदि वन्ध गाथा २४ १४-११५ नामकर्म के बन्धस्थानों का विवेचन नामकर्म के बन्धस्थानों में भूयस्कार आदि बन्ध १११ नामकर्म के बन्धस्थानों में सातवें भूयस्कार के सम्बन्ध में: स्पष्टीकरण आठ कर्मों की उत्तर प्रकृतियों के बन्धस्थाम तथा भूय- । स्कार आदि बंधों का कोष्टक गाथा २६, २७ . ११५-१२२ मूल कर्मों की उत्कृष्ट स्थिति मूल कर्मों की जघन्य स्थिति व उसका स्पष्टीकरण . ११७ गाथा २८ .. १२२-१२४ ज्ञानावरण, दर्शनावरण, अन्तराय कर्म को सभी उत्तर : प्रकृतियों की उत्कृष्ट स्थिति असाता वेदनीय और नामकर्म की कूछ उत्तर प्रकृतियों -। . की उत्कृष्ट स्थिति
SR No.090243
Book TitleKarmagrantha Part 5
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages491
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy