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________________ विषय गतिमागंगा के भेखों का स्वरूप गंगा के मेवों का स्वरूप कश्यमार्गणा के मेवों का स्वरूप योगमार्गणा के मेवों का स्वरूप स्वरूप गंगा के मेवों का कषायमार्गणा के मेवों का स्वरूप जानमार्गणा के मेवों का स्वरूप संयममात्र वनमार्गणा के मेवों का स्वरूप श्यामार्गेणा के मेवों का स्वरूप मध्यस्य मार्गणा के मेवों का स्वरूप सम्पदमार्गणा के मेवों का स्वरूप मार्गणा के मेवों का स्वरूप मार्गणाओं में जोवस्थान बहारसागंणा के मेवों का स्वरूप सागरों में गुणस्थान मार्गगाओं में योग मनोयोग के मेवों का स्वरूप : वचनयोग के मेवों का स्वरूप काययोग के मेवों का स्वरूप मार्गनाओं में योग का विचार मार्गणाओं में उपयोग मार्गणात्रों में लेहपा --- मार्गणाओं का अल्प- बहुत्व गतिमार्गणा का अल्प-त्य 444 २) i : ... ... 74. --- www 140 ... ... -44 ! 724 . ... .. 03 A ... 4. ... 37 :: 440 : : : ... E A ... : ⠀ : ... Irr .~. 340 140 ... wa -- 3 ४२ ५० ५२ ५२ 보글 ५५ ५६ ५७ ५२ ૬ ६५ ክን ६७ ८० 安い Et ૨ EX १०५ ११५ ११५
SR No.090242
Book TitleKarmagrantha Part 4
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages363
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size5 MB
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