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गा
प्राक
२६४
ख
क्षायिक क्षायिक
१३-खइग[६६-१२] २२,३३,४४.६७-२ -ख/-इय[१९६
६४.६-७ १६,२०५२
७५-खवण
६-खित ७५-खिप्पड़
७४--खिबिय ८१.८४--खिवसु
क्षेपण क्षिप्त क्षिप्यते वित्वा
'क्षायिक'-नामक सम्यक्त्व विशेष । 'क्षायिक'-नामक सम्यक्त्व तथा
मिशेल । हालना। द्वाना हुआ। डाला जाता है। डालकर । डालो। 'क्षीणमोह' नामक बारहवां गुणस्थान तथा नष्ट । 'क्षेप' नामक संख्या-विशेष । पुरग्लों का समूह ।
क्षिय
५५.६०६२२-१-बीग
क्षीण
७०,७४.७५,७६
८१.८४-खेसले)ब
क्षेप
स्कन्ध
ग
कर्मग्रन्थ भाग चार
६.६६---ाइ [४७-११]
१६-गइतस
गति गतित्रस
गति'नामक मार्गणा-विशेष । 'तेज.काय' और 'वायुकाय'-नामक स्थावर-विशेष ।