SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 42
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १२ www.lade गाथाओं में संग्रह की गई प्रकृतियों के नाम इस प्रकार हैं-(१) तीर्थङ्कर नामकर्म, (२) देवद्वि-देवगति, देवानुपूर्वी, (३) क्रियद्विक वैक्रिय शरीर वैक्रिय अंगोपांग, AURLAL (४) आहारकद्विक आहारक शरीर, आहारक अंगोपांग, (५) देवायु, (६) नरकत्रिक—– नरकगति, नरकानुपुर्वी, नरकायु, (७) सूक्ष्मत्रिक सूक्ष्म नाम, अपर्याप्त नाम, साधारण नाम: (८) विकसत्रिक हीन्द्रिय जाति, श्रीन्द्रिय जाति चतुरिन्द्रिय F JAA जाति, (६) एकेन्द्रिय जाति, (१०) स्थावर नाम, (११) आतप नाम, (१२) नपुंसक वेद, (१३) मिथ्यात्व माहनीय, TELE www. turefire (१४) झुंड संस्थान, (१५) सेवा संहनन, (१६) अनन्तानुबंधी चतुष्क- अनन्तानुबन्धी क्रोध, मान, माया, लोभ, ( १७ ) मध्यम संस्थानचतुष्क- न्योम्रध परिमंडल, सादि, वामन, अर्ध कुब्ज संस्थान, (१८) मध्यम संहननचतुष्क-- ऋषभनाराच, नाराच कीलिका संहनन, (१६) अशुभ विहायोगति, (२०) नीचगोत्र. TIT (२१) स्त्रीवेद, (२२) दुर्भगत्रिक दुभंग नाम, दुःस्बर नाम, अनादेय नाम, (२३) स्थानक - निद्र निद्रा, प्रचलाप्रचला, स्त्यानa, (२४) स्रोत नाम, F नाराचं,
SR No.090241
Book TitleKarmagrantha Part 3
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages267
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy