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प्रथम कर्मग्रन्थ को गापाएँ
सूरहिदुरही रसा पण तित्तकडुकसाय अनिता मजुरा । फासा गुरुलहुमिउखरसी उम्ह सिणिद्धरूपलट्ठा ॥४॥ नील कसिणं दुगंधं तितं कड्य गुह रुक्स। सीयं च असुहनवर्ग इक्कारसग सुभं असं ॥१४२।। चउह गइवणुपुष्वीगइ पृथ्विदुर्ग तिग निधाउजुर्य । पुथ्वीउदओ बक्के सुहअसुह वसुट्ट विहगई ॥४३॥ परधाउदया पाणी परसिं बलिणं पि होइ दुरिसो। ऊससणद्धिजुत्तो हवेइ ऊसासनामवसा ॥४४॥ रविधिबे उ जियंग लावजुये आयवाउ न उ जलये ।। जमुसिणफासस्स तहि लेहियवन्नस्स उदउ ति ॥४५॥ अणुसिणपयासरूवं जियंगमुज्जोयए इहुज्जोया है जइदेवुत्तरत्रिविकयजोइसखजजायमाइव्व ॥४६॥ अंगं न गुरु न लहुयं जायद जीवस्स अगुरुलहुउदया। तित्थे तिहुयणस्स वि पुज्जो से उदओ केवस्लिमो ॥४७॥ अङ्गोवंगनियमणं निम्माणं कुणइ सुत्तहारसमे । अबघाया उवहम्मइ सतणुक्यबलं बिगाईहिं ॥४॥ बितिचउपणिदिन तसा वायरओ वायरा लिया थूला । नियनियपज्जत्तिजुया पज्जत्ता लद्धिकरणेहि ॥४६| पत्तेय तण पत्ते उदयेणं दंतढिमाई घिर ३ नामुवरि सिराइ सुहे सुभगाओ सव्वजण इ8ो ॥५०॥ सुसरा मुहरसुहझुणी आइज्जा सब्बलोयगिज्झवओ। जसओ जसकित्तीओ थावरदसगं विवज्जल्यं ॥५१॥