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________________ द्वितीय कर्मग्रन्थ : परिशिष्ट (E) प्रत्यारयानावरणकषायोदय-अविनाभावी--प्रत्याख्यानावरण क्रोध, मान, माया, लोभ, तिर्यचति, तिर्यंचायु, नौगोत्र, उद्योत नामकर्म । (१०) प्रमत्तभाव-अविनाभावी-निद्रा-निद्रा, प्रचला-प्रचला. स्त्यानद्धि। (११) पूर्वकरण-अविनाभावी-अर्धनाराचसंहनन, कीलिकासंहनन, सेवार्तसंहनन। (१२) तथाविध संक्लिष्टपरिणाम-अविनाभावी-हास्य, रति, अरति, शोक, भय, जुगुप्सा । (१३) बाबरकषायो विनामपदी - पुमाटेद, नीदेव, नए मक. वेद, संज्वलन क्रोध, मान, माया। (१४) अयथाख्यातचारित्र-अविनाभावी-संज्वलन लोभ । १ (१५) अक्षपक-अविनाभावी-ऋषभनाराचसंहनन, नाराचसंहनन । ___{१६) छादमस्थिकभाव-अविनाभावी - निद्रा, प्रचना, ज्ञानावरणपंचक, दर्शनावरणचतुष्क अन्तरायपंचक । ((१७) बादरकाययोग-अविनाभावी-औदारिकशरीर, औदारिकअंगोपांग, अस्थिर, अशुभ, शुभविहायोगति, अशुभविहायोगति, प्रत्येक, स्थिर, शुभ, समचतुरस्रसंस्थान, न्यग्रोधपरिमण्डलसंस्थान, सादिसंस्थान, वामनसंस्थान, कुब्जसंस्थान, हुण्डसंस्थान, अगुरुलघु, उपघात, पराघात, श्वासोच्छ्वास, वर्ण, गन्ध, रस, स्पर्श, निर्माण, तेजसशरीर, कार्मणशरीर, वज्र ऋषभनाराचसंहनन । (१८) बादरवचनयोग-अविनाभावी-- दुःस्वर, सुस्वर नाम। २
SR No.090240
Book TitleKarmagrantha Part 2
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages251
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
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