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________________ १२२ कर्मविपाक रसनामकर्म के पांच भेद और उनके लक्षण इस प्रकार हैं--(१) तिक्तरस, (२) कटु रस, (३) कषायरस, (४) अम्लरस, (५) मधुररस । (१) जिस कर्म के उदय से जीव का शरीर-रस सोंठ या काली मिर्च जैसा चरपरा हो, उसे तिक्तरसनामकर्म कहते हैं। (२) जिस कर्म के उदय से जीव का शरीर-रस चिरायता, नीम जंसा कटु हो, उसे कटुरसनामकर्म कहते हैं। (६} जिस कर्म के उदय मे जीव का शरीर-रस आंवला, बहेड़ा जैसा कसला हो, वह कषायरसनामकर्म है । (४) जिस कर्म के उदय से जीव का शरीर-रस नीबू, इमली जैसे खट्टे पदार्थों जैसा हो, वह अम्लरसनामकर्म कहा जाता है । (२) जिस कर्म के उदय से जीव का शरीर-रस मिश्री आदि मीठे पदार्थों जैसा हो, उसे मधुर-रसनामकर्म कहते हैं । स्पर्शनामकर्म के आठ भेद और उनके लक्षण क्रमशः इस प्रकार हैं (१) गुरु, (२) लघु, (३) मदु, (४) खर, (५) शीत, (६) उष्ण, (७) स्निग्ध और (८) रूक्ष । प्रत्येक के साथ स्पर्श नामकर्म जोड़ लेना चाहिए । (१) जिस कम के उदय से जीव का शरीर लोहे जैसा भारी हो, वह गुरुस्पर्शनामकर्म है। (२) जिस कर्म के उदय से जीव का शरीर आक की रुई जैसा हल्का हो, वह लघुस्पर्शनामकर्म है । (३) जिस कर्म के उदय स जीव का शरीर मक्खन जैसा कोमल हो, वह मृदुस्पर्शनामकर्म है।
SR No.090239
Book TitleKarmagrantha Part 1
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages271
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
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