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________________ -10२] कर्मप्रकृतिः [ १२८, बादरनामकर्मणः लक्षणम् ] बाबरनाम परैर्वाध्यमानं स्थूलशरीरं करोति । [१२१. सूक्ष्मनामकमण; लक्षणम् | सूक्ष्मनाम परैरबाध्यमानं सूक्ष्मारोरं करोति । । [१३०. पर्याप्सनामक्रमशः लक्षणम् | पर्यातनाम स्वस्वपर्याप्तीनां पूर्णतां करोति । [१३१. अपर्याप्तनामकर्मणः लक्षणम् । अपर्यामनाम स्वस्वपर्याप्तीनामपूर्णतां करोति । [ १३२. पर्याप्तीनां पड् भेदाः ] पप्रियश्चाहारशरीरेन्द्रियोच्छ्वासनिःश्वासभाषामनःसंबन्धेन घोडा भवन्ति । १२८, बादर नाम कर्मका लक्षण बादर नाम कर्म दूसरोंके द्वारा बाधा दिये जाने योग्य स्थूल शरीरको करता है। १२९. सूक्ष्म नाम कर्मका लक्षण सूक्ष्म नाम कर्म दूसरोंके द्वारा बाधा न दिये जाने योग्य सूक्ष्म शरीर करता है। १३०, पर्याप्त नाम कर्मका लक्षण पर्याप्त नाम कर्म स्व-स्व पर्याप्तियोंकी पूर्णता को करता है। १३१. अपर्याप्त नाम कर्मका लक्षण अपर्याप्त नाम कर्म अपनी-अपनी पर्याप्तियों की अपूर्णता करता है।
SR No.090237
Book TitleKarmaprakruti
Original Sutra AuthorAbhaynanda Acharya
AuthorGokulchandra Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages88
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size1010 KB
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