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________________ १४६ क्रम २. ३. ४. ५. ६. ७. 4. 5 स्थलचर (उरपरिसर्प) १. सामान्य उरपरिसर्प २. संमूर्च्छिम उरपरिसर्प ३. संमूर्च्छिम अपर्याप्त उरपरिसर्प ४. संमूर्च्छिम पर्याप्त उरपरिसर्प सामान्य गर्भज उरपरिसर्प ६. अपर्याप्त गर्भज उरपरिसर्प ७. पर्याप्त गर्भज उरपरिसर्प नाम १. २. 3 ४. ५. ६. ७. १. २. ३. ४. ५. ६. ७. संमूर्च्छिम चतुष्पद अपर्याप्त सम्मूर्च्छिम चतुष्पद पर्याप्त सम्मूर्च्छिम चतुष्पद सामान्य गर्भज 'चतुष्पद अपर्याप्त गर्भज चतुष्पद पर्याप्त गर्भज चतुष्पद जीवसमास खेचर सामान्य खेचर सामान्य संमूर्च्छिम खेचर संमूर्च्छिम अपर्याप्त खेचर संमूमि पर्याप्त खेचर सामान्य गर्भज खेचर गर्भज अपर्याप्त खेचर गर्भज पर्याप्त खेचर उत्कृष्ट अवगाहना गव्यूति पृथक्त्व अंगुल के असंख्यातवें भाग गव्यूति पृथक्त्व छः गव्यूति परिमाण अंगुल के असंख्यातवें भाग छः गव्यूति एक हजार योजन योजन पृथकत्व अंगुल के असंख्यातवें योजन पृथकत्व एक हजार योजन परिमाण अंगुल का असंख्यातवां भाग एक हजार योजन स्थलघर (भुजपरिसर्प) सामान्य भुजपरिसर्प गव्यूति पृथकृत्व सामान्य संमूर्च्छिम भुजपरिसर्प | धनुष पृथकृत्व संमूर्च्छिम अपर्याप्त भुजपरिसर्प संमूर्च्छिम पर्याप्त भुजपरिसर्प सामान्य गर्भज भुजपरिसर्प गर्भज अपर्याप्त भुजपरिसर्प गर्भज पर्याप्त भुजपरिसर्प अंगुल का असंख्यातवां भाग धनुष पृथकत्व गव्यूति पृथक्त्व अंगुल का असंख्यातवां भाग गव्यूति पृथकत्व धनुष पृथकत्व धनुष पृथकृत्व अंगुली का असंख्यातवां भाग धनुष पृथक्त्व धनुष पृथकत्व अंगुल का असंख्यातवां भाग धनुष पृथक्त्व अधन्य अवगाहना अंगुल का असंख्यातवां भाग
SR No.090232
Book TitleJivsamas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagarmal Jain
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1998
Total Pages285
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size5 MB
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