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________________ ( ३४ ) विषय पृ. सं. विषय यहाँ जो स्थिति, गुणश्रेणिशीर्ष बनती है . खुलासा ___इसके निर्देशपूर्वक विशेष खुलासा ७५ गुणकारपरावृतिके विषयमें स्पष्टीकरण अन्तिम स्थितिकाण्डकके पतन होनेपर कृत- कृतकरणीयका मरण होने पर कब कहाँ करणीय संज्ञा प्राप्त होती है ८१ ___ जन्म होता है इसका निर्देश ८६ इस कालमें मरण और लेश्यापरिवर्तन भी उक्त जीवके पीतादि लेश्याओंमें रहनेके हो सकता है इसका विशेष खलासा ८१ कालनियमका निर्देश इसका परिणाम संक्लिष्ट या विशुद्ध किसी प्रकृतमें उपयोगी अल्पबहुत्वका निर्देश ९० प्रकारका भी हो, उदीरणा असंख्यात समय- सूत्र गाथाओंके अनुसार विशेष कथनका ___ प्रबद्धोंको होती है इसका खुलासा ८२ | निर्देश १०१ इसके उत्कृष्ट उदीरणा भी उदयके असं- उसमें भी पांचवीं गाथाके आधारसे सत्, ख्यातवें भागप्रमाण होती है इसका 7 संख्या आदिको जाननेकी सूचना १०१ ___ संयमासंयम अर्थाधिकार मंगलाचरण १०५ | अपूर्वकरणमें होनेवाले कार्यविशेषोंका इस अनुयोगद्वारके विषयमें एक सूत्रगाथा निर्देश निबद्ध है इसका निर्देश १०५ यहाँ संयमासंयमपरिणामनिमित्तक गुणवह एक सूत्रगाया १०६ श्रेणिका निषेध प्रकृतमें उपयोगी शंका-समाधान अपूर्वकरणके अनन्तर समयमें संयमाउक्त सूत्र गाथाका स्पष्टीकरण १०७ संयमलब्धिकी प्राप्ति सूत्रगाथामें आये हुए वृद्धावृद्धि पदका संयमासंयमलब्धिके प्राप्त होने पर भी स्थितिकाण्डकघात आदि कार्य होते खुलासा १०८ प्रकृतमें उपशामना पदका खुलासा १०८ हैं इसका निर्देश प्रकारान्तरसे संयमासंयमलब्धिका संयमासंयमसम्बन्धी गुणश्रेणिका विधान १२४ खुलासा करते हुए उसके मुख्य तीन यहाँ गुणश्रेणिं अवस्थितप्रमाणवालो भेदोंका स्पष्टीकरण १११ होती है इसका खुलासा १२५ वृद्धावृद्धिपदका प्रकारान्तरसे खुलासा अधःप्रवृत्तसंयतासंयत होने पर स्थितिउक्त सूत्रगाथाके अनुसार विशेष व्याख्यान काण्डकघात आदि कार्य नहीं होते इसका निर्देश की प्रतिज्ञा ११३ | संयमासंयमसे पतन होने पर पुनः उसको संयमासंयमलब्धिकी प्राप्तिमें दो ही प्राप्ति कब कैसे होती है इसका कारण होते हैं, अनिवृत्तिकरण नहीं विचार होता इसका खुलासा ११३ संयमासंयम रहने तक गुणश्रेणि होते संयमसंयमलब्धिके प्राप्त होनेके पूर्व रहनेका नियम वेदकप्रायोग्य मिथ्यादृष्टिके होनेवाले परिणामोंके अनुसार गुणश्रेणिमें तारकार्य विशेष ११४ - तम्यका निर्देश अधःप्रवृत्तकरणमें क्या कार्य विशेष संयमासंयमसे गिरकर पुनः किस अवस्था होते हैं इसका खुलासा ११६ | ___में दो करणपूर्वक उसे प्राप्त करना अधः प्रवृत्तकरणमें होनेवाली तीव्र है इसका निर्देश मन्दतासम्बन्धी अल्पबहुत्व ११७ प्रकृतमें उपयोगी अल्पबहुत्वका निर्देश १३२ १३१
SR No.090225
Book TitleKasaypahudam Part 13
Original Sutra AuthorGundharacharya
AuthorFulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
PublisherBharatvarshiya Digambar Jain Sangh
Publication Year2000
Total Pages402
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size13 MB
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