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________________ ३७५ गा०५८] उत्तरपयडिपदेससंकमे भुजगारो ५८३. कुदो ? संखेजसमयसंचिदेइंदियरासिस्स पहाणीमावेणेत्थविवक्खिय त्तादो। ® अप्पयरसंकामया असंखेजगुणा । $ ५८४. किं कारणं ! पलिदोवमासंखेजभागमेत्तप्पयरकालसंचयावलंबणादो। * भुजगारसंकामया संखेजगुणा । ५८५. कुदो? धुवबंधीणमप्पयरकालादो भुजगारकालस्स संखेजगुणत्तोवएसादो। * इत्थिवेदहस्सरदीणं सव्वत्थोवा प्रवत्तव्यसंकामया। ६५८६. संखेजोवसामयजीवविसयत्तेण पयदावत्तव्वसंकामयाणं थोवभावसिद्धीए विरोहाभावादो। ® भुजगारसंकामया अणंतगुणा । $ ५८७. कुदो ? अंतोमुहुत्तमेससगबंधकालसंचिदेइंदियरासिस्स गहणादो। अप्पयरसंकामया संखेजगुणा । $ ५८८. कुदो १ सगबंधकालादो संखेजगुणपडिवक्खबंधगद्धाए संचिदरासिस्स गहणादो। www ६५८३. क्योंकि संख्यात समयके भीतर सञ्चित हुई एकेन्द्रिय जीव राशिप्रधानरूपसे यहाँ पर विवक्षित है। * उनसे अल्पतर संक्रामक जीव असंख्यातगुणे हैं। ६५८४. क्योंकि पल्यके असंख्यातवें भागप्रमाण अल्पतर कालके भीतर हुए सञ्चयका यहाँ पर अवलम्बन लिया गया है। * उनसे भुजगारसंक्रामक जीव संख्यातगुणे हैं। ६५८५. क्योंकि ध्रुवबन्धी प्रकृतियोंके अल्पतर कालसे भुजगारकालके संख्यातगुणे होनेका उपदेश है। * स्त्रीवेद, हास्य और रतिके अवक्तव्यसंक्रामक जीव सबसे स्तोक हैं। ६५८६. क्योंकि संख्यात उपशामक जीवोंके सम्बन्धसे प्रकृत अवक्तव्यसंक्रामक जीवोंके स्तोकपनेके सिद्ध होनेमें कोई विरोध नहीं आता। ___ * उनसे भुजगारसंक्रामक जीव अनन्तगुणे हैं। ६५८७. क्योंकि अन्तर्मुहूर्तप्रमाण अपने बन्धकालके भीतर सश्चित हुई एकेन्द्रिय जीव राशिको यहाँ पर ग्रहण किया है। * उनसे अल्पतर संक्रामक जीव संख्यातगुणे हैं। ६५८८. क्योंकि अपने बन्धकालसे संख्यातगुणे प्रतिपक्ष बन्धक कालके भीतर सञ्चित हुई जीवरा शिको यहाँ पर ग्रहण किया है।
SR No.090221
Book TitleKasaypahudam Part 09
Original Sutra AuthorGundharacharya
AuthorFulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
PublisherBharatvarshiya Digambar Jain Sangh
Publication Year2000
Total Pages590
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size19 MB
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