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________________ २१७ १६७ २३७ २५४ [22] विषय पृष्ठ विषय समुत्कीर्तना १५६ जघन्य और उत्कृष्ट संक्रम कालका एकसाथ प्ररूपणा ओर प्रमाणका एकसाथ कथन १५७ निरूपण २१२ अल्पबहुत्व १६२ जयघवलाद्वारा उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट संक्रम स्वस्थान अल्पबहुत्व ६३. कालका निरूपण २१२ परस्थान अल्पबहुत्व १६३ जयधवला द्वारा जघन्य और अजघन्य संक्रम प्रदेशसंक्रम कालका निरूपण अन्तरके कहनेको प्रतिज्ञा २२३ 'मंगलाचरण उत्कृष्ट संक्रमके अन्तरका विचार .२२३ प्रदेशसंक्रम कहनेकी प्रतिज्ञा १६८ जघन्य संक्रमके अन्तरका विचार २३० मलप्रकृतिप्रदेशसंक्रमका होना नहीं बनता १६८ सन्निकर्षके कहनेकी प्रतिज्ञा २३७ उत्कृष्ट संक्रम सनिकर्ष उत्तरप्रकृतिप्रदेशसंक्रम जघन्य संक्रम सन्निकर्ष २४३ प्रकृतमें उपयोगी अर्थपदका निर्देश १६८ उत्कृष्ट संक्रम परिणाम २५२ अर्थपदके समर्थनमें उदाहरण व अन्यत्र जघन्य संक्रम परिणाम २५३ इसी प्रकार जाननेकी सूचना १६६ उत्कृष्ट-जघन्य संक्रम क्षेत्र २५३ प्रदेशसंक्रमके पाँच भेद १७० उत्कृष्ट संक्रम स्पर्शन उनके नाम १७० जघन्य संक्रम स्पर्शन २५८ उदलनासंक्रमका विशेष विचार १७० नानाजीवोंकी अपेक्षा उत्कृष्ट संक्रमकाल २६२ विध्यातसंक्रमका विशेष विचार १७१ नानाजीवोंकी अपेक्षा जवन्य संक्रमकाल २६३ अधःप्रवृत्तसंक्रमका विशेष विचार १७१ नानाजीवोंकी अपेक्षा उत्कृष्ट संक्रम अन्तर २६४ गुणसंक्रमका विशेष विचार १७२ नानाजीवोंकी अपेक्षा जघन्य संक्रम अन्तर २६४ सर्वसंक्रमका विशेष विचार १७२ २६५ पाँचों संक्रमोंमें अल्पबहुत्व १७२ अल्पबहुत्वके कहनेकी प्रतिज्ञा २४अनयोगद्वार व भुजगार आदिकी सूचना १७३ उत्कृष्ट संक्रम अल्पबहुत्व २६५ ममत्कीर्तनाके दो मेद व उनका निरूपण १७३ नरकगतिमें उत्कृष्ट संक्रम श्रल्पबहत्व २६६ भागाभागके दो मेद १७४ शेष गतियों में जाननेकी सूचना २७२ प्रदेशभागाभागके भी दो भेद १७४ एकेन्द्रियोंमें उत्कृष्ट संक्रम अल्पबहुत्व २७३ उत्कृष्ट प्रदेशभागाभाग १७४ जघन्य संक्रम अल्पबहुत्व २७५ स्वस्थान भागाभाग १७४ नरकगतिमें जघन्य संक्रम अल्पबहुत्व २८१ बघन्य प्रदेशभागाभागके जाननेकी सूचना १७५ तिर्यञ्चगतिमें नरकगतिके समान जाननेकी सर्वसंक्रम नोसर्वसंक्रम १७७ सूचना उत्कृष्टसंक्रम श्रादि चारको प्रदेशविभक्तिके देवगतिमें विशेष विचार समान जाननेकी सूचना . १७६ एकेन्द्रियमें जवन्य संक्रम अल्पबहुत्व २८५ सादि श्रादि चार अनुयोगद्वार १७६ भुजगार स्वामित्वके कहनेकी प्रतिज्ञा १७६ उत्कृष्ट स्वामित्व १७७ भुवगार विषयक अर्थपदके कहनेकी सूचना २८९ जयन्य स्वामित्व १६४ भुबमारपदका अर्थ २८९ एक जीवकी अपेक्षा कालके कहनेकी प्रतिज्ञा २११ अल्पतरपदका अर्थ २६० भाव २६५ २८४ २८५
SR No.090221
Book TitleKasaypahudam Part 09
Original Sutra AuthorGundharacharya
AuthorFulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
PublisherBharatvarshiya Digambar Jain Sangh
Publication Year2000
Total Pages590
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size19 MB
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