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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-७४४ देशसंयतगुणस्थानमें असंयमके स्थान पर देशसंयम तथा देव नरकगतिका अभाव हुआ । यहाँ प्रत्येकपद १६, मतिज्ञानके १, श्रुतज्ञानके २, अवधिज्ञानके ४, चक्षुदर्शन के ८, अचक्षुदर्शनके १६, अवधिदर्शनके ३२, दानके ६४, लाभके १२८, भोगके २५६, उपभोगके ५१२, वीर्यके १०२४, अज्ञानके २०४८, देशसंयमक ४४९६, असिद्धत्व के १९२, जीवत्व १६, ३८४ एवं भव्यत्वके ३२,७६८ हैं । यहाँ भव्यत्वके जो ३२७६८ भंग हैं वे पण्णट्टीका आधा प्रमाण है। इनके दूने अर्थात् पणीप्रमाण एकगतिसम्बन्धी भंग हैं इनको तिर्यञ्च व मनुष्य इन दो गतिसे गुणा करने पर दोपणीप्रमाण भंग दो गतिसम्बन्धी जानना । एकगतिसम्बन्धी भंगसे दोगुणे अर्थात् २ पण्णट्टीप्रमाण भंग एक लिंगके हैं। इनको तिर्यञ्चके ३ व मनुष्यके ३ इसप्रकार ६ लिंगसे गुणा करें तो ६x२= १२ गुणी पण्णट्टीप्रमाण भंग हैं। एकलिंगसम्बन्धी भंगोंसे दूने अर्थात् ४ पण्णीप्रमाण एककषायके भंग हैं इनको तिर्यञ्चगतिमें तीनलिंगसहित चारकषाय अर्थात् (३४) १२ से, मनुष्यगतिर्मे तीनलिंगसहित चारकषायसे अर्थात् (३x४) १२ से इसप्रकार (१२+१२) २४४ गुणी पणट्टी = ९६ गुणीपण्णट्टीप्रमाण भंग हुए। एककषायके भंगोंसे दूने अर्थात् आठगुणीपण्णडीप्रमाण एकलेश्यासम्बन्धी भंग हैं इनको तिर्यञ्चगति में तीनलिंग व चारकषायसहित तीनलेश्या, मनुष्यगतिमें ३ वेद व चारकषायसहित तीनलेश्यासे अर्थात् दोनों गतिकी अपेक्षा (३६ + ३६) ७२ से गुणा करनेपर ७२८ × पण्णट्टी - ५७६ गुणी पण्णीप्रमाण भंग हुए। आगे एक लेश्या भंगोंसे दूने अर्थात् १६ गुणी पण्णडीप्रमाण भंग एक सम्यक्त्वसम्बन्धी जानना, इनको तिर्यञ्चगतिमें तीनलिंग व चारकषायसहित ३ लेश्या अर्थात् (३x४×३) ३६से, मनुष्यगतिमें तीनलिंग व चारकषायसहित ३ लेश्यासे गुणाकरे, इसप्रकार दोनोंगतिसम्बन्धी (३६ + ३६) ७२४१६ = ११५२ गुणित पण्णीप्रमाण भङ्ग उपशमसम्यक्त्वसम्बन्धी हैं तथा इतने ही (१९५२) क्षयोपशमसम्यक्त्वमें भी जानना । क्षायिकसम्यक्त्वमें एकलेश्यासम्बन्धी उपर्युक्त भंगों से दूने अर्थात् १६ गुणे पण्णीप्रमाण भन हैं उनको मनुष्यगति में तीनलिंग व चारकषायसहित ३ लेश्यासे अर्थात् ( ३x४× ३) ३६से गुणाकरे तो ३६×१६×पण्णट्टी =५७६ गुणी पण्णीप्रमाण भंग हुए। इसप्रकार देशसंवतगुणस्थानमें दो सम्यक्त्वसम्बन्धी सर्वमिलकर (१+२+१२+१६+५७६+११५२+११५२) २९९१ से गुणित तथा क्षायिकसम्यक्त्वकी अपेक्षा ५७६ गुणे इन दोनोंको जोड़नेपर (२९९९+५७६) ३५६७ से गुणित पण्णट्टीप्रमाणमें से एक कम करने पर जो लब्ध आवे उतने प्रमाण भंग जानने चाहिए। x प्रमत्तगुणस्थान में मन:पर्ययज्ञानरूप प्रत्येकपद है तथा देशसंयमके स्थानपर सरागसंयम, अन्यगतियोंके अभाव से एक मनुष्यगतिरूप भी प्रत्येकपद जानना शेष प्रत्येक पद पूर्वोक्त ही होनेसे यहाँ १८ प्रत्येकपद, मतिज्ञानका १, श्रुतज्ञानका २, अवधिज्ञानके ४, मन:पर्ययज्ञानके ८, चक्षुदर्शनके १६, अचक्षुदर्शनके ३२, अवधिदर्शनके ६४, दानलब्धिके १२८, लाभलब्धिके २५६, भोगलब्धिके ५१२, उपभोगलब्धिके १०२४, वीर्यलब्धिके २०४८, अज्ञानके ४०९६, असिद्धत्वके ८१९२. सकलसंयमके १६३८४, जीवत्त्व के ३२७६८, भव्यत्वके पण्णीप्रमाण और मनुष्यगतिके २ x पण्णीप्रमाणभङ्ग जानना ।
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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