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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-६८१ अप्रमत्त व अपूर्वकरणगुणस्थानसम्बन्धी ३ कूटभय-जुगुप्सारहित | भय या जुगुप्सासहित । भय-जुगुप्सासहित | ९ में से कोई एक | ९ में से कोई एक बोग, ९ में से कोई एक योग भय-जुगुप्सा २ योग ९ हास्य-रति -1 अरति-शोक २-२ २-२ वेद ३ १-१-१ १-१-१ १-१-१-१ कषाय ४ १-१-१-१ १-१-१-१ बन्धप्रत्यय २२ अनिवृत्तिकरणगुणस्थानसम्बन्धी ७ कूट ला कूट | रा कूट | ३रा कूट | ४था कूट कूट 4वाँ कूट | ६ठा कूट | ७ वाँ कूट ३ वेदसहित | २ वेदसहित | ४ कषाय सहित सहित ३ कषाय २ कषाय | | १ बादरसहित | सहित | लोभ कषाय सहित | योग योग ९ । ९ में से १ , ९ में से १ | ९ में से १ |९ में से १ ९ में से १|९ में से १] ९ में से १ योग । योग योग योग योग योग वेद३ १-१-१ | १-१ कषाय ४ | १-१-१-१ | १-१-१-१ | १-१-१-११-१-१-१ | १-१-५ | १-१ बन्धप्रत्यय १६ सूक्ष्मसाम्पराय-उपशान्तकषाय-क्षीणकषाय व सयोगकेवलीसम्बन्धी कूटगुणस्थान । सूक्ष्मसाप्पराय । उपशान्तकषाय । क्षीणकषाय । सयोगकेवली योग ९ ||९ में से कोई एक | ९ में से कोई एक मा ९ में से कोई एक | ७ में से कोई एक सयोगके - कषाय १ बन्धप्रत्यय । २ । १
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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