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________________ # & grupy # SVI गोम्मटसार कर्मकाण्ड - ६४५ ३० प्रकृतिका ही है । देवगतिमें ९१ प्रकृतिका सत्त्व वैमानिकदेवोंके असंयतगुणस्थानमें ही होता है। वहाँ मनुष्यगति व तीर्थङ्करयुत बन्ध ३० प्रकृतिका और उदय २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृति का जानना । ९० प्रकृतिक सत्त्वस्थान चारोंगतिके जीवोंमें पाया जाता है। नरकगतिमें सर्वनारकियोंके ९० प्रकृतिक सत्त्व रहते हुए मिथ्यात्वगुणस्थानमें तिर्यञ्च या मनुष्यगतिसंयुक्त २९ एवं तिर्यञ्चउद्योतयुत ३० प्रकृतिक बन्धसहित २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका उदय पाया जाता है, किन्तु यहाँ विशेष इतना है कि माघवी पृथ्वी के मिध्यादृष्टिजीवोंमें मनुष्ययुत २९ प्रकृतिक बन्ध नहीं है । ९० प्रकृतिक ही सत्त्व रहते हुए सासादनगुणस्थान में बन्ध तो मिथ्यात्वगुणस्थानवत् और उदय २९ प्रकृतिरूप है, मिश्रगुणस्थानमें मनुष्ययुत २९ प्रकृतिक बन्ध और उदय भी २९ प्रकृतिका ही है, असंयतगुणस्थानमें बन्ध मनुष्ययुत २९ प्रकृतिका है एवं उदय धर्मानरकमें तो २१-२५-२७-२८ व २९ तथा वंशादिपृथ्वियोंमें उदय २९ प्रकृतिका ही है । तिर्यज्योंके ९० प्रकृतिका सत्त्व रहते हुए मिथ्यात्वगुणस्थानमें बन्ध २३-२५-२६- २८-२९ व ३० प्रकृतिका एवं उदय २१ - २४-२५-२६-२७-२८ २९ ३० व ३१ प्रकृतिका है; सासादनगुणस्थान में बन्ध देवगतिसंयुक्त २८ प्रकृतिका, तिर्यञ्च या मनुष्ययुत २९ और तिर्यञ्च - उद्योतयुत ३० प्रकृतिका है, उदय २१-२४-२६-३० व ३१ प्रकृतिका मिश्रगुणस्थान में बन्ध देवगतियुत २८ प्रकृतिका एवं उदय ३० व ३१ प्रकृतिका है, असंयतगुणस्थानमें बन्ध देवगतियुत २८ प्रकृतिका और उदय २१-२६-२८-२९३० व ३१ प्रकृतिका है, देशसंयतमें बन्ध देवगतिसंयुक्त २८ एवं उदय ३० व ३१ प्रकृतिका है। मनुष्यों में ९० प्रकृतिका सत्त्व रहते हुए मिथ्यात्वगुणस्थानमें बन्ध २३-२५-२६- २८-२९ व ३० प्रकृतिका, उदय २१-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिका; सासादनगुणस्थान में बन्ध देवगतिसंयुक्त २८, तिर्यञ्च या मनुष्यगतियुत २९ तिर्यञ्च व उद्योतसहित ३० प्रकृतिका एवं उदय २१ - २६ व ३० प्रकृतिका है; मिश्रणस्थान में बन्ध देवगतियुत २८ प्रकृतिका और उदय ३० प्रकृति का; असंयतगुणस्थान में बन्ध देवगतिसहित २८ प्रकृतिका तथा उदय २१-२६-२८- २९ व ३० प्रकृतिका है; देशसंयत से अपूर्वकरणगुणस्थानके छठेभागपर्यन्त बन्ध देवगतिसंयुक्त २८ प्रकृतिका, अपूर्वकरणके सप्तमभागसे सूक्ष्मसाम्परायगुणस्थानपर्यन्त बन्ध १ प्रकृतिका एवं उपशान्तकषायगुणस्थान में बन्धका अभाव है, उदय देशसंयतसे उपशान्तकषायगुणस्थानपर्यन्त ३० प्रकृतिका ही है । देवोंके ९० प्रकृतिका सत्त्व रहते हुए मिथ्यात्वगुणस्थान में भवनत्रिक और सौधर्मयुगलके देवोंमें बन्ध २५-२६-२९ व ३० प्रकृतिका, आगे सहस्रारस्वर्गपर्यन्त १० स्वर्गों में तिर्यञ्च या मनुष्यगतिसहित २९ प्रकृतिक और तिर्यंचगति व उद्योतयुत ३० प्रकृतिक, आरतस्वर्गसे उपरिमग्रैवेयकपर्यन्त मनुष्यगतिसंयुक्त २९ प्रकृतिका है, उदय भवनत्रिकसे उपरमयैवेयकपर्यन्त २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका है; सासादनगुणस्थानमें बन्ध भवनत्रिकसे सहस्रारस्वर्गपर्यन्त तिर्यञ्च या मनुष्यगतिसंयुक्त २९ अथवा तिर्यञ्च उद्योतयुत ३० प्रकृतिका, आनतस्वर्ग उपरिमग्रैवेयकपर्यन्त मनुष्यगतिसहित २९ प्रकृतिका, उदय भवनत्रिकसे उपरिमग्रैवेयकपर्यन्त २१-२५ व २९ प्रकृतिका है, मिश्रगुणस्थानमें भवनत्रिकसे उपरिमग्रैवेयकपर्यन्त बन्ध मनुष्यगतिसंयुक्त २९ प्रकृतिका
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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