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गोम्मटसार कर्मकाण्ड-५९३
है तथा उदय ८ व ५ प्रकृति का होता है। ६ प्रकृतिके उदयमें सम्यक्त्वप्रकृति का उदय नहीं होनेसे क्षायिकसम्यक्त्वमें २१ प्रकृतिक सत्त्वस्थान हैं। उपशमसम्यक्त्वमें ६ प्रकृति का उदय होनेपर २८ और २४ प्रकृतिक दो सत्त्वस्थान हैं।
१३ प्रकृति के बन्धसहित देशसंयतगुणस्थानमें तिर्यञ्च व मनुष्यके उपशम या वेदकसम्यक्त्व होता है, देशसंयत गुणस्थानमें क्षायिकसम्यक्त्व मनुष्यके ही होता है। क्षायिकसम्यक्त्व तो भोगभूमिज तिर्यंचके भी होता है, किन्तु भोगभूमिज जीवोंके देशसंयम नहीं होता है। ८ प्रकृतिका उदय होनेसे वेदकसम्यक्त्वी तिर्यञ्चके २८-२४ प्रकृतिरूप दो सत्त्वस्थान और मनुष्यके २८-२४-२३ व २२ प्रकृतिक चार सत्त्वस्थान हैं। ७ व ६ प्रकृतिका उदय होते हुए तिर्यञ्च व मनुष्यके उपशमसम्यक्त्वमें तो २८ व २४ प्रकृतिरूप दो, वेदकसम्यग्दृष्टि तिर्यंचक्रे २८ व २४ प्रकृतिके दो और वेदकसम्यक्त्वी मनुष्यके २८२४-२३ व २२ प्रकृतिरूप चार सत्त्वस्थान हैं । देशसंयतगुणस्थानुवर्ती क्षायिकसम्यग्दृष्टि मनुष्य ही होते हैं इसलिए २१ प्रकृत्तिका ही सत्त्व है। ५ प्रकृतिका उदय रहते हुए उपशमसम्यक्त्वी मनुष्य व तिर्यंचके २८ व २४ प्रकृतिरूप दो सत्त्वस्थान हैं, किन्तु क्षायिकसम्यक्त्वी मनुष्यके २१ प्रकृतिका ही सत्त्वस्थान है। ९ प्रकृतिके बन्धसहित प्रमत्त-अप्रमत्तके ७-६-५ व ४ प्रकृतिक चार उदयस्थान हैं। इनमेंसे सातप्रकृतिका उदय होते हुए वेदकसम्यग्दृष्टि ही है अत: २८-२४-२३ और २२ प्रकृतिक चार सत्त्वस्थान हैं। ६ व ५ प्रकृतिका उदय होते हुए उपशमसम्यग्दृष्टिके तो २८ व २४ प्रकृतिका सत्त्व है तथा वेदकसम्यक्त्वीके २८-२४-२३ व २२ प्रकृतिक चार सत्त्वस्थान हैं, क्षायिकसम्यग्दृष्टिके २१ प्रकृतिक एकही सत्त्वस्थान है। चार प्रकृतिका उदय होते हुए उपशमसम्यक्त्नमें २८ व २४ प्रकृतिक और क्षायिकसम्यक्त्वमें २१ प्रकृतिक सत्त्वस्थान है।
९ प्रकृतिके बन्धसहित अपूर्वकरणगुणस्थानमें ६-५ व ४ प्रकृतिका उदय होते हुए उपशमसम्यग्दृष्टिके २८ व २४ प्रकृतिक दो सत्त्वस्थान हैं और क्षायिकसम्यक्त्वमें २१ प्रकृतिक सत्त्वस्थान होता है। ५ एवं ४ प्रकृतिक बन्धस्थानमें २ प्रकृतिक उदयस्थानसहित उपशमसम्यक्त्वमें २८ व २४ प्रकृतिक सत्त्वस्थान और क्षायिकसम्यक्त्वमें २१-१३-१२ व ११ प्रकृतिक चार सत्त्वस्थान हैं तथा ४ प्रकृतिका बन्ध एवं १ प्रकृति का उदय होनेपर उपशमसम्यग्दृष्टिके २८ व २४ प्रकृतिक और क्षायिकसम्यक्त्वमें २१-११-५ व ४ प्रकृतिक सत्त्वस्थान हैं। ३ प्रकृतिका बन्ध एवं १ प्रकृतिका उदय होते हुए उपशमसम्यक्त्वीके २८ व २४ प्रकृतिक दो तथा क्षायिकसम्यक्त्वमें २१-४ व ३ प्रकृतिक तीन सत्त्वस्थान हैं। २ प्रकृतिका बन्ध और १ प्रकृतिके उदयसहित अनिवृत्तिकरणगुणस्थानसम्बन्धी उपशमसम्यक्त्वमें २८ व २४ प्रकृतिक दो तथा क्षायिकसम्यक्त्व में २१-३ व २ प्रकृतिक तीन सत्त्वस्थान हैं। १ प्रकृति का बन्ध और १ प्रकृति के उदयसहित उपशमसम्यक्त्वमें २८ व २४ प्रकृतिक दो तथा क्षायिक सम्यक्त्वमें २१-२ व १ प्रकृतिक सत्त्वस्थान हैं। यहाँ क्षपकअनिवृत्तिकरणके ४-३-२ व १