SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 623
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ उदय स्थान १० ९ ९ १ ९ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ मोहनीयकर्म के उदयस्थान में बन्ध व सत्त्वस्थानसम्बन्धी सन्दृष्टि - उदयस्थानगत प्रकृति विवरण 'मि. क. वे. यु. भ. जु. १-४-१-२-१-१ १-४-१-२-x-x १-३-१-२-१-० ४.१.२.१० मिश्र - ३-१-२-१-० सभ्य. ३-१-२-१-० x-३-१-२-१-१ बंध स्थान २२ १-४-१२-१-० १-३-१-२-१-१ २२ x*४-१-२-१-१ २१ मिश्र-१-३-१-१-१-१ १७ सम्य.-१-३-१-२-१-१ .१७ सम्य. २-१-२-१-१ * २२ २२ २१ १७ १७ १७ बन्धस्थानगत प्रकृति विवरण मि. क. वे. यु.भ.-जु. १-१६-१-२-१-१ १-१६-१-२-१-१ १-१६-१-२-१-१ ४- १६-१-२-१-१ x-१२-१-२-१-१ x - १२-१-२-१-१ गुण स्थान प्रथम प्रथम प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ १-१६-१-२-१-१ प्रथम १-१६-१-२-१-१ प्रथम x.१६-१-२-१-१ द्वितीय x-१२-१-२-१-१ तृती x-१२-१-२-१-१ चतुर्थ x-१२-१-२-१-१ चतुर्थ x-८-१-२-१-१ पञ्चम सत्त्वस्थान २८ २७ २६ २८,२७.२६ २८ २८ २८-२४ २८-२४ २३-२२ १८,२७,२६ २८ २८ २८, २४ २८,२४,२३,२२ २८,२४,२१ २८,२४,२१ सत्त्वस्थानगत प्रकृति विवरण मि. स. - मि.अन. अप्र.प्र.सं.बे. नो. १-१-१-४-४-४-४-३-६-२८ १ - ४-१-४-४-४-४. ३-६-२७ है -×- × • ४-४-४-४-३-६-२६ उपर्युक्त उपर्युक्त उपर्युक्त १-१-१-x-४-४-४-३-६=२४ x-१-१-४४-४-४-३-६-२३ x-१-x-x-४-४-४-३-६-२२ उपर्युक्त उपर्युक्त उपर्युक्त उपर्युक्त उपर्युक्त * - *-x-x - ४-४-४-३-६-२१ उपर्युक्त गोम्मटसार कर्मकाण्ड -५८४ म आया IN MAR
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy