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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-५८३ प्रकृतिक तीन सत्त्वस्थान हैं, ९ प्रकृतिरूप उदयस्थानमें २२-२१ व १७ प्रकृतिरूप तीन बन्धस्थान और २८-२७-२६-२४-२३-२२ प्रकृतिक ६ सत्त्वस्थान हैं, ८ प्रकृतिक उदयस्थानमें २२-२१-१७ व १३ प्रकृतिक चार बन्धस्थान तथा सत्त्वस्थान २८-२७-२६-२४-२३-२२ और २१ प्रकृतिक हैं, ७ प्रकृतिक उदयस्थानमें २२-२१-१७-१३ व ९ प्रकृतिरूप पाँच बन्धस्थान एवं २८-२४-२३-२२ व २१ प्रकृतिक पाँच सत्त्वस्थान है, ६ प्रकृतिक उदयस्थानमें १७-१३ और ९ प्रकृतिक तीन बन्धस्थान, २८-२४-२३२२ व २१ प्रकृतिक पाँच सत्त्वस्थान हैं। ५ प्रकृतिरूप उदयस्थानमें १३ व ९ प्रकृतिक दो बन्धस्थान एवं सत्त्वस्थान २८-२४-२३-२२ व २१ प्रकृतिक पाँच हैं, ४ प्रकृतिक उदयस्थानमें ९ प्रकृतिक एक ही बन्धस्थान और २८-२४ व २१ प्रकृतिक तीन सत्त्वस्थान हैं, २ प्रकृतिक उदयस्थानमें ५ व ४ प्रकृतिक दो बन्धस्थान एवं २८-२४-२१ प्रकृतिक सत्त्वस्थान तो उपशमश्रेणीकी अपेक्षा एवं २१-१३१२ व ११ प्रकृतिक सत्त्वस्थान क्षपकश्रेणीकी अपेक्षा इसप्रकार ६ सत्त्वस्थान हैं। ५ प्रकृतिक उदयस्थानमें ४-३-२ व १ प्रकृतिक चार बन्धस्थान एवं उपशमश्रेणीकी अपेक्षा २८-२४ व २१ प्रकृतिक तीन और ११-५-४-३-२ व १ प्रकृतिक ५ इसप्रकार ८ सत्त्वस्थान जानना। १. सम्यग्दृष्टिके १ प्रकृतिका उदयस्थान सम्यक्त्वप्रकृतिके उदवसहित ही होता है और २१ प्रकृतिक सत्त्वस्थानमें सम्यक्त्वप्रकृति का सत्त्व नहीं है अत: ९ प्रकृतिक उदयस्थान में २१ प्रकृतिक सत्त्वस्थान सम्भव नहीं है।
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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