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गोम्मटसार कर्मकाण्ड - ४८१
गुणस्थानोंकी अपेक्षा मोहनीयकर्मके सत्त्वस्थानों की संदृष्टि'
विशेष विवरण
२८-२७ व २६ प्रकृतिरूप । २६ प्रकृतिकस्थान सम्यक्त्वव सम्यग्मिथ्यात्वप्रकृतिकी उद्वेलना होनेसे बनत। और इन दोनों प्रकृतियोंकी उद्वेलना चारों ही गतिके मिथ्यादृष्टिजीव करते हैं। यह २६ प्रकृतिरूपस्थान अनादिमिथ्यादृष्टिजीवके भी होता
गुणस्थान
मिथ्यात्व
सासादन
मिश्र
असंद.. देशसंयत
प्रमत्त
अप्रमत्त
अपूर्वकरण
उपशमश्रेणी
अपूर्व क्षपक श्रेणी
अनिवृत्तिकरण
उपशम श्रेणी
अनि. क्षपक श्रेणी
सूक्ष्मसापराय उपशम श्रेणी
सूक्ष्म, क्षपक श्रेणी
उपशांतकषाय
१. प्रा.प.स.पू. ४८३ |
सत्त्वस्थान
३
१
२
५.
३
४.
३
९
३
१
३
है।
२८ प्रकृति रूप ।
२८-२४ प्रकृतिरूप | २०१८-२४-२३-२२ व २१ प्रकृतिरूप | २८-२४-२३-२२ व २१ प्रकृतिरूप २८-२४-२३-२२ व २१ प्रकृतिरूप | २८-२४-२३-२२ व २१ प्रकृतिरूप । २८- २४-२१ प्रकृतिरूप ।
२१ प्रकृतिरूप । २८-२४-२१ प्रकृतिरूप ।
२१-१३-१२-११-५-४-३-२ १ प्रकृति रूप । २८-२४-२१ प्रकृतिरूप ।
१ सूक्ष्मलोभरूप |
२८-२४-२१ प्रकृतिरूप ।