SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 50
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-१२ - अर्थ - ज्ञानावरणादि आठ कर्मों के क्रमसे पाँच, नौ, दो, अट्ठाईस, चार, तिरानवै अथवा एक सौ तीन, दो और पाँच उत्तरभेद होते हैं। ताड़पत्रीय मूल गो. क. से उद्धृत सूत्र णाणावरणीयं दसणावरणीयं वेदणीयं मोहणीयं आउगंणामं गोदं अंतरायं चेइ। तत्थ णाणावरणीय पंचविहं आभिणिबोहिय-सुद-ओहि-मणपज्जव णाणावरणीयं केवलणाणावरणीयं चेइ।दसणावरणीयं णवविहं थीणगिद्धि णिहाणिदा पयलापयला णिद्दा । य पयला य चक्खु-अचक्नु-ओहिदंसणावरणीयं केवलदसणावरणीयं चेइ। सूत्रार्थ - (कर्म की आठ मूल प्रकृतियाँ हैं) ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र, अन्तराय । इनमें भी ज्ञानावरणीय पाँच प्रकार का है - अभिनिबोधक-श्रुत-अवधि व मन:पर्ययज्ञानावरण तथा केवलज्ञानावरण। दर्शनावरण नव प्रकार है - स्त्यानगृद्धि, निद्रानिद्रा, प्रचलाप्रचला, निद्रा व प्रचला तथा चक्षु-अचक्षु-अवधिदर्शनावरण और केवलदर्शनावरण। अब दर्शनावरणीय के उत्तरभेदों में से निद्राओं का कार्य बताते हैं - - थाणुदयणुट्ठावदे, सोवाद कम्मं करेदि जप्पदि य। णिद्दाणिद्दुदयेण य, ण दिट्ठिमुग्घादिदं सक्को ॥२३॥ अर्थ - स्त्यानगृद्धिनिद्रा के उदय से उठाया जाने पर भी सोता रहता है उस नींद में ही अमेक | कार्य करता है तथा कुछ बोलता भी है, परन्तु सावधानी नहीं रहती। निद्रानिद्राकर्म के उदय से अनेक प्रकार से सावधान किया हुआ भी आँखें नहीं खोल सकता है। पयलापयलुदयेण य, वहेदि लाला चलंति अंगाई। णिहुदये गच्छंतो, ठाइ पुणो वइसइ पड़ेई॥२४॥ अर्थ - प्रचलाप्रचलाकर्म के उदय से मुख से लार बहती है और हाथ आदि अङ्ग चलते हैं, किन्तु सावधान नहीं रहता तथा निद्राकर्म के उदय से गमन करता हुआ खड़ा हो जाता है, बैठ जाता है, गिर पड़ता है इत्यादि क्रियायें करता है। पयलुदयेण य जीवो, ईसुम्मीलिय सुवेइ सुत्तोवि। ईसं ईसं जाणदि, मुहं मुहं सोवदे मंदं ॥२५॥
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy