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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-४०४ सान्तर-निरन्तरबन्धी १-८ प्रत्येक शरीर साधारणशरीर १ त्रस १-८ १ स्थावर सुभग दर्भग स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वोदयबन्धी स्वोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी १-४ सुस्वर दुःस्वर शुभ সম बादर १-१४ । १०३ सूक्ष्म १ १०४ पर्याप्त अपर्याप्त सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी निरन्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी निरन्तरबन्धी १०६ स्थिर १०७ १-८ स्वपरीदियबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वोदयबन्धी स्वोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी परोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वपरोदयबन्धी स्वोदयबन्धी अस्थिर आदेय अनादेय यशस्कीर्ति अयशस्कीर्ति तीर्थङ्कर उच्चगोत्र नीचगोत्र १-१४ १-४ १-४ १-१०॥ ४-८ | १३-१४ ११३ १-१४ १-२ ११५ १-१०] १.१२ ११६-१२० अन्तराय ५ "इति नवप्रश्नचूलिका प्रकरण सम्पूर्ण"
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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